वैवाहिक सम्बन्ध के कुछ विपरीत योग : 👉1- यदि पुरुष जातक की कुण्डली में सप्तमेश अपनी नीचराशि या नीच नवमांश में स्थित हो, और - 👉(क)- किसी अशुभ भाव में हो* 👉(ख)- अपने नैसर्गिक शत्रुग्रह से दृष्ट हो* 👉(ग)- अपने नैसर्गिक शत्रुग्रह से किसी योग (चतुर्विधि) में हो* 👉 तब या तो ऐसे जातक का विवाह ही नहीं होगा अथवा विवाह होने पर भी उसे एकाकी जीवन जीना पड़ेगा ! 👉2- यदि किसी पुरुष जातक की कुण्डली में शुक्र अपनी नीच राशि या नीच नवमांश में स्थित हों और वह शुक्र कुण्डली के सप्तमेश ( जैसे कि सूर्य, मंगल, बृहस्पति या चन्द्र ) का नैसर्गिक शत्रुग्रह हो तब यह स्थिति उसके वैवाहिक जीवन में समरसता के लिए बाधक बनी रहती है ! 👉3- उसी प्रकार यदि किसी स्त्री जातक की कुण्डली में बृहस्पति अपनी नीचराशि या नीच नवमांश में स्थित हों और वह बृहस्पति महिला के सप्तमेश का नैसर्गिक शत्रुग्रह भी हो (जैसे कि शुक्र, बुध या शनि ) तब यह योग भी वैवाहिक समरसता के लिए अनुकूल नही होगा ! 👉4- यदि किसी जातक का सप्तमेश अपने ही लग्नेश से असाधारण रूप से बलवान हो तब वह जातक अपने जीवनसाथी के अधीन रहेगा, या कहें उससे भयभीत रहेगा ! 👉5- यद...