💢नक्षत्रो के वैदिक मंत्र 💢1. अश्विनी नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ अश्विनौ तेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वती वीर्य्यम वाचेन्द्रो बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम। ॐ अश्विनी कुमाराभ्यो नम:।” • अर्थ: अश्विनी कुमार, जो ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक हैं, को नमस्कार। 💢2. भरणी नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ यमायत्वा मखायत्वा सूर्य्यस्यत्वा तपसे देवस्यत्वा सवितामध्वा नक्तु पृथ्विया स गवं स्पृशस्पाहिअर्चिरसि शोचिरसि तपोसी।” • अर्थ: यमराज, जो धर्म और तपस्या के देवता हैं, को नमस्कार। 💢3. कृतिका नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ अयमग्नि सहत्रिणो वाजस्य शांति गवं वनस्पति: मूर्द्धा कबोरीणाम। ॐ अग्नये नम:।” • अर्थ: अग्नि देवता, जो शक्ति और प्रकाश के प्रतीक हैं, को नमस्कार। 💢4. रोहिणी नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ ब्रहमजज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमत: सूरुचोवेन आव: सबुधन्या उपमा अस्यविष्टा: स्तश्चयोनिम मतश्चविवाह। ॐ ब्रहमणे नम:।” • अर्थ: ब्रह्मा, सृजन के देवता, को नमस्कार। 💢5. मृगशिरा नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ सोमधेनु गवं सोमाअवन्तुमाशु गवं सोमोवीर: कर्मणयन्ददाति यदत्यविदध्य गवं सभेयम्पितृ श्रवणयोम। ॐ चन्द्रमसे नम:।” • अर्थ: चंद्रमा देवता, जो शांति और ...