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Showing posts from May, 2020

किवाड़

क्या आपको पता है ? कि किवाड़ की जो जोड़ी होती है, उसका एक पल्ला पुरुष और, दूसरा पल्ला स्त्री होती है। ये घर की चौखट से जुड़े - जड़े रहते हैं।  हर आगत के स्वागत में खड़े रहते हैं।  खुद को ये घर का सदस्य मानते हैं।  भीतर बाहर के हर रहस्य जानते हैं। एक रात उनके बीच था संवाद  चोरों को लाख - लाख धन्यवाद ,  वर्ना घर के लोग हमारी , एक भी चलने नहीं देते हम रात को आपस में मिल तो जाते हैं, हमें ये मिलने भी नहीं देते। घर की चौखट से साथ हम जुड़े हैं, अगर जुड़े जड़े नहीं होते।  तो किसी दिन तेज आंधी -तूफान आता, तो तुम कहीं पड़ी होतीं, हम कहीं और पड़े होते। चौखट से जो भी एक बार उखड़ा है। वो वापस कभी भी नहीं जुड़ा है। इस घर में यह जो झरोखे ,और खिड़कियाँ हैं।  यह सब हमारे लड़के,और लड़कियाँ हैं। तब ही तो, इन्हें बिल्कुल खुला छोड़ देते हैं।  पूरे घर में जीवन रचा बसा रहे,  इसलिये ये आती जाती हवा को,  खेल ही खेल में , घर की तरफ मोड़ देते हैं। हम घर की सच्चाई छिपाते हैं।  घर की शोभा को बढ़ाते हैं।  रहे भले कुछ भी खास नहीं ,  पर उससे ज्यादा बतलाते हैं।  इसील...

क्या आपके पास कोई जवाब है ?

आपात काल के दौरान भोपाल केन्द्रीय कारागार में संघ स्वयं सेवक, जनसंघ कार्यकर्ताओं के साथ जमायते इस्लामी के लोग भी वंदी थे | जमायते इस्लामी के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना इनामुर्रहमान को ठाकरे जी ने आग्रह पूर्वक अपनी बैरक में ही रखा | वहां विद्यार्थी परिषद् के तत्कालीन संगठन मंत्री श्री सूर्यकांत जी केलकर की इन मौलाना साहब से अच्छी खासी मित्रता हो गई | वे साथ साथ भोजन उपरांत टहलते, दिन में शतरंज की बाजी लगाते, हंसते बतियाते | एक दिन मजाक मजाक में दोनों में गंभीर चर्चा छिड़ गई | केलकर जी ने कहा कि मैं " या इलाह इल्लिल्लाह मोहम्मद रसूल लिल्लाह" अर्थात "इश्वर एक है, व्यापक है मोहम्मद साहब पैगम्बर है मार्ग दर्शक हैं", इसमें यकीन करता हूँ | उन्होंने मजाक में ही पूछ लिया कि अब बताइये कि मैं भी मुसलमान हूँ कि नहीं ? मौलवी साहब ने आँखे तरेर कर पूछा कि इस सवाल के पीछे तुम्हारा मकसद क्या है ?  केलकर जी ने हंसते हुए कहा कि कुछ नहीं मैं केवल यह कह रहा हूँ कि जैसे अल्लाह ताला ने भटके हुए लोगों को रास्ता दिखाने मोहम्मद साहब को भेजा, बैसे ही और महापुरुषों को भी भेजा | तुम उन्हें भी पैगम्बर...