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Showing posts from April, 2022

सफल खिलाड़ी के योग

कुंडली मे सफल खिलाड़ी का योग ■■■■■■■■■■■■■■■ 1】 मजबूत लग्न और लग्न के स्वामी - स्वास्थ शरीर,स्वस्थ मस्तिष्क, प्रथम भाव से शरीर और सिर का बिचार किय्या जाता है।। स्वस्थ शरीर मे स्वस्थ मस्तिष्क का विकाश होता है।   2】तीसरा घर - अखंड प्रतिभा साहस, वीरता, कौशल का घर।  हाथ, पैर, फिटनेस, ताकत।  आंतरिक सोच को साकार करने की इच्छा। 3】पंचम भाव -  दिशा का निर्देश का घर ।  प्रज्वलित अव्यक्त प्रतिभा को दिशा , सर्प माइंड, तेज़ी से समझने की सूझबूझ,  4】दशम भाव - हाउस ऑफ ऑपर्चुनिटीज ऑब्जेक्टिव फील्ड उच्चतम स्तर पर।  सम्मान, पद, प्रसिद्धि। 5】 ग्यारहवां घर - अहसास का घर।  लक्ष्य, आकांक्षाएं और महत्वाकांक्षा।  आदर्शों और इच्छाओं की प्राप्ति।  लाभ का घर।  6】नवम भाव -भाग्य का घर ,हजार योग्यता होने पर भी भग्य का साथ के विना कुछ भी संभव नही होता,, ।। ■ प्रमुख सम्भवना के कारक - शुक्र और चंद्रमा की युति या अन्य सम्बन्ध  ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■   कल्याण वर्मा की सारावली , अध्याय 15   1】विद्वान= (बृहस्पति + बुध),   2】निपुणः= (शनि + बुध) ...

प्रेम तथा अंतरजातीय विवाह

प्रेम तथा अंतरजातीय विवाह  1. लग्न तथा सप्तम भाव में चंद्र शुक्र का योग  2. पंचम एकादश में यह योग  3. लग्न पंचम या सप्तम या एकादश यह ले ल भाव पर स्त्री राशियों का होना  4. राहु केतु का अष्टम में होना लग्न , सप्तम , पंचम या एकादश या द्वितीय  5. पंचम सप्तम के स्वामी एक दूसरे के भाव में जाएं या एकादश भाव में स्थित हो या एक साथ ही किसी भी प्रकार का संबंध बने  प्रेम तथा अंतरजातीय विवाह जातक का प्रेम संबंध उसकी सफलता या विफलता , वैध तथा अवैध शारीरिक संबंध , आकर्षण उनके शारीरिक संबंध , किडनॅप , बलात्कार आदि गतिविधियां इसी भाव से देखी जाती है ।  ■ यह भाव मुख्य रूप से स्त्री पुरुष के शारीरिक तथा चुंबकीय आकर्षण का केंद्र बिंदु है  ■ शारीरिक संबंध 5,12 या 5 , 8 या 8 , 11 ■प्रेम समाप्त होना 5 , 6 , 8 , 12 , 10  ■ प्रेमी के साथ विवाह ना होना 6 , 12 , 4 , 10 , 1  ■अंतरजातीय विवाह 2.7.11 भावों तथा राहू केतु को अवश्य देखें 15 भाव भी जुड़ता है विवाह के सूचक ग्रहों की दशो अंतर्दशा में राहु केतु भी जुड़ते हैं । ■  साथ रहना 5 , 11 , 12 यदि गुप्त संबंध ...

कुण्डली में एक से अधिक विवाह योग

कुण्डली में.एक से अधिक विवाह योग : आपने देखा होगा कि कई लोगो के जीवन में प्रेम सम्बन्ध या विवाह का योग केवल एक ही नहीं होता बल्कि एक से अधिक होता है ! यही नहीं कई बार तो कुछ लोगों के अनेक सम्बंध होते हैं ! कई बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति एक सम्बन्ध टूटने या या एक जीवनसाथी की मृत्यु के बाद दुसरे सम्बन्ध में पड़ता है  ! परन्तु कई बार तो ऐसी स्थिति  भी देखी जाती है कि व्यक्ति एक साथ ही एक से अधिक रिश्ते बना लेता है ! ऐसी स्थितियां क्यों होती हैं ? आइए जानते हैं कि कौन से ग्रह या योग और उनकी स्थितियां  इसके लिए जिम्मेदार हैं – 1. यदि सप्तमेश अपनी नीच राशी में स्थित हो तब जातक की दो पत्नियाँ या दो महिला से सम्बन्ध  होते हैं ! 2. यदि सप्तमेश, पाप ग्रह के साथ किसी पाप ग्रह की राशि में स्थित हो और जन्मांग या नवमांश का सप्तम भाव शनि या बुध की राशि में हो तब दो विवाह की सम्भावनाएं बनती हैं ! 3. यदि मंगल और शुक्र सप्तम भाव में स्थित हो या सप्तम भाव में शनि स्थित हो और लग्नेश अष्टम भाव में हो तब जातक के तीन विवाह या सम्बन्ध  हो सकते हैं ! 4. यदि सप्तमेश सबल हो, शुक्र द्विस्...

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र  अयि गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते। गिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते। भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।१।। सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते। त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते।। दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणी सिन्धुसुते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।२।। अयि जगदम्बमदम्बकदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते। शिखरिशिरोमणि तुङ्गहिमालय शृंगनिजालय मध्यगते।। मधुमधुरे मधुकैटभगन्जिनि कैटभभंजिनि रासरते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।३।। अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते। रिपु गजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रम शुण्ड मृगाधिपते।। निजभुज दण्ड निपतित खण्ड विपातित मुंड भटाधिपते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।४।। अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते। चतुरविचारधुरीणमहाशिव दूतकृत प्रथमाधिपते।। दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदूत कृतान्तमते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिन...