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सिद्ध कुंजिका स्त्रोत

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को कितने दिनों तक कितनी संख्या में किया जाना चाहिए ताकि यह जागृत हो सके? सिद्ध कुंजिका स्तोत्र यह स्तोत्र श्रीरुद्रयामल के गौरीतंत्र में शिव पार्वती संवाद के नाम से उदधृत है. श्रीदुर्गा सप्तशती में सिद्धकुंजिका स्तोत्र है, और ज्यादा प्रभावशाली भी है. मात्र कुंजिका स्तोत्र के पाठ से सप्तशती के सम्पूर्ण पाठ का फल मिल जाता है. इसके मंत्र स्वतः सिद्ध किये हुए हैं, अतः इनको अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है. यह अद्भुत स्तोत्र है, जिसका प्रभाव बहुत चमत्कारी है. इसके नियमित रूप से पाठ से समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है. नाम के अनुरूप यह सिद्ध कुंजिका है। जब किसी प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा हो, समस्या का समाधान नहीं हो रहा हो, तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करिए। भगवती आपकी रक्षा करेंगी। भगवान शंकर कहते हैं कि सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ करने वाले को देवी कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास और यहां तक कि अर्चन भी आवश्यक नहीं है। केवल कुंजिका के पाठ मात्र से दुर्गा पाठ का फल प्राप्त हो जाता है। इसके पाठ मात्र से मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन ...
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राहुल सिंह राठौर 2

अभी देश का माहौल बहुत पैनिक करनेवाला है। ऐसे में बहुत धैर्य की आवश्यकता है। काल का प्रत्येक खण्ड किसी के लिए बहुत शुभ होता है तो किसी के लिए बहुत अशुभ होता है। ज्योतिषियों ने पैनिक सिचुएशन की भविष्यवाणी 29 मार्च 2025 के बाद के लिए किया था जब मीन राशि में शनि प्रवेश करके छ: ग्रह युति करने लगे थें। इससे डेढ़ महीना पहले फरवरी महीने में मेरे अत्यंत घनिष्ठ मित्र की इकलौती लड़की मात्र उन्नीस वर्ष की आयु में गुजर गयी। उसे अचानक पेट में दर्द हुआ और उसके बाद हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया और मात्र छ: घंटे के अंदर उसका देहांत हो गया। हमारे मित्र ने अपने और अपने परिवार के किसी सदस्य को कोरोना वायरस का टीका भी नहीं लगवाया था कि सारा दोष उसे दे दिया जाए कि उस टीका के प्रभाव से अचानक मृत्यु हो गयी। जो आज हो रहा है वो सब पहले भी होता रहा है। आज सबके हाथ में मोबाइल है, चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिसके कारण ये दुर्घनाएं रेकॉर्ड हो जा रही हैं। हमारे मित्र की तो पूरी दुनिया ही उजड़ गयी। उस समय शनि के मीन राशि में गोचर को भी दोष नहीं दे सकतें, क्योंकि वो फरवरी में आया ही नहीं था। उनकी व्यक्तिगत कुण्डली...

शेयर बाजार में सफलता

शेयर मार्केट में सफलता के योग कुंडली में देखना एक महत्वपूर्ण विषय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव वित्तीय सफलता, विशेषकर शेयर मार्केट में, को निर्धारित करता है। नीचे कुछ मुख्य योग और ग्रह स्थिति दी गई हैं जो शेयर मार्केट में सफलता का संकेत देती हैं: 1. बुध ग्रह की स्थिति बुध ग्रह बुद्धि, तर्क, और व्यापार का कारक ग्रह है। यदि बुध मजबूत हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो व्यक्ति को व्यापार और शेयर मार्केट में सफलता मिलती है। बुध का दूसरे, पांचवें, नवें या ग्यारहवें भाव में होना शुभ माना जाता है। बुध पर शुभ ग्रहों (जैसे बृहस्पति या शुक्र) की दृष्टि हो तो और भी लाभकारी होता है। 2. ग्यारहवें भाव की स्थिति ग्यारहवां भाव लाभ और आय का भाव है। यदि ग्यारहवें भाव का स्वामी शुभ ग्रहों के साथ हो और अशुभ ग्रहों से मुक्त हो, तो शेयर मार्केट में सफलता के योग बनते हैं। ग्यारहवें भाव में बृहस्पति, शुक्र या बुध की स्थिति लाभकारी होती है। 3. पंचम भाव और निवेश योग पंचम भाव निवेश, सट्टा, और भविष्य के लाभ को दर्शाता है। पंचम भाव का स्वामी अगर लाभ स्थान ...

पंचक के नक्षत्र और शेयर बाजार पर प्रभाव

पंचक के नक्षत्र और शेयर बाजार पर प्रभाव पंचक पांच विशिष्ट नक्षत्रों का समूह है, जो चंद्रमा के कुंभ और मीन राशि में गोचर के दौरान आता है। ये नक्षत्र हैं: 1. धनिष्ठा 2. शतभिषा 3. पूर्वाभाद्रपद 4. उत्तराभाद्रपद 5. रेवती इन नक्षत्रों का प्रभाव अलग-अलग होता है और यह शेयर बाजार में निवेशकों की मानसिकता, भावनात्मक स्थिरता और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकता है। --- नक्षत्रों का बाजार पर प्रभाव 1. धनिष्ठा नक्षत्र (जोश और जोखिम का समय) बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। निवेशक अधिक जोखिम लेने का रुझान दिखा सकते हैं। इस समय में इंट्राडे ट्रेडिंग में सावधानी बरतें। 2. शतभिषा नक्षत्र (अनिश्चितता और रहस्य) बाजार में अचानक बड़ी गिरावट या उछाल देखने को मिल सकता है। नए निवेश करने से बचें, और मौजूदा पोर्टफोलियो का विश्लेषण करें। 3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (संतुलन का समय) इस नक्षत्र में बाजार स्थिर रह सकता है। सुरक्षित और लंबे समय के लिए निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। 4. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (स्थिरता और प्रगति) यह नक्षत्र स्थिरता और सकारात्मकता का प्रतीक है। बाजार में स्थिरता आ सकती है और निवेशकों को...

नक्षत्रों के वैदिक मंत्र

💢नक्षत्रो के वैदिक मंत्र  💢1. अश्विनी नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ अश्विनौ तेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वती वीर्य्यम वाचेन्द्रो बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम। ॐ अश्विनी कुमाराभ्यो नम:।” • अर्थ: अश्विनी कुमार, जो ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक हैं, को नमस्कार। 💢2. भरणी नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ यमायत्वा मखायत्वा सूर्य्यस्यत्वा तपसे देवस्यत्वा सवितामध्वा नक्तु पृथ्विया स गवं स्पृशस्पाहिअर्चिरसि शोचिरसि तपोसी।” • अर्थ: यमराज, जो धर्म और तपस्या के देवता हैं, को नमस्कार। 💢3. कृतिका नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ अयमग्नि सहत्रिणो वाजस्य शांति गवं वनस्पति: मूर्द्धा कबोरीणाम। ॐ अग्नये नम:।” • अर्थ: अग्नि देवता, जो शक्ति और प्रकाश के प्रतीक हैं, को नमस्कार। 💢4. रोहिणी नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ ब्रहमजज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमत: सूरुचोवेन आव: सबुधन्या उपमा अस्यविष्टा: स्तश्चयोनिम मतश्चविवाह। ॐ ब्रहमणे नम:।” • अर्थ: ब्रह्मा, सृजन के देवता, को नमस्कार। 💢5. मृगशिरा नक्षत्र: • मंत्र: “ॐ सोमधेनु गवं सोमाअवन्तुमाशु गवं सोमोवीर: कर्मणयन्ददाति यदत्यविदध्य गवं सभेयम्पितृ श्रवणयोम। ॐ चन्द्रमसे नम:।” • अर्थ: चंद्रमा देवता, जो शांति और ...

पितृ पक्ष और ग्रह

PITRU PAKSH & PLANETS   ANCESTORS & 8th 9th House   Disclaimer: Views expressed below are my own original findings & observations from my original research. I do not wish to challenge any traditional texts or views.  From today , Pitru Paksh is starting till 2nd october. I will be discussing my OWN POINT OF VIEW why this time period is very important for people with certain combinations in astrology From the 8th house , we see the ORIGIN OF THE SOUL & GENERATIONAL/ANCESTERAL KARMIC DEBT the soul of the person is carrying. From the 9th house , we see the PAST LINEAGE of their ancestors.  The same way we carry the genes of our family , the similar manner we carry the KARMIC DEBTS of our ancestors from both paternal and maternal family.  Here, I am giving the list of planets & combinations with Houses where there is a MAJOR PITR DOSH and MAJOR ANCESTERAL KARMIC DEBT. These can be remediated through very simple offerings:  1.Sun ...

नक्षत्र और शरीर के अंग

.         #27_नक्षत्र_और_शरीर_के_अंग :  (Relation Between Nakshatra and Body Parts) : .   वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को भी शरीर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है ! सभी 27 नक्षत्र शरीर के किसी ना किसी अंग का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन अंगों से  सम्बंधित परेशानी भी व्यक्ति को हो जाती हैं ! जो नक्षत्र जन्म कुण्डली में पीड़ित होता है उससे सम्बंधित बीमारी व्यक्ति को होने की  सम्भावना बनती है अथवा जब कोई नक्षत्र गोचर में पीड़ित अवस्था में होता है,  तब उससे सम्बंधित अंग में परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है !  .       इस लेख के माध्यम से आज हम उन सभी नक्षत्रों व उनसे सम्बंधित शरीर के अंगों के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ इससे आपके मन में उठने वाले ऐसे प्रश्नो का समाधान हो जायगा ! मेरे कुछ शिष्य अक्सर यह जानना चाहते हैं कि कौन सा नक्षत्र शरीर के किस अंग का प्रतिनिधित्व करता है ! इससे उनका भी समाधान हो जायेगा ! #अश्विनी_नक्षत्र : अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु हैं ! यह पहला नक्षत्र है और इसलिए यह सिर के ...