अभी देश का माहौल बहुत पैनिक करनेवाला है। ऐसे में बहुत धैर्य की आवश्यकता है। काल का प्रत्येक खण्ड किसी के लिए बहुत शुभ होता है तो किसी के लिए बहुत अशुभ होता है। ज्योतिषियों ने पैनिक सिचुएशन की भविष्यवाणी 29 मार्च 2025 के बाद के लिए किया था जब मीन राशि में शनि प्रवेश करके छ: ग्रह युति करने लगे थें। इससे डेढ़ महीना पहले फरवरी महीने में मेरे अत्यंत घनिष्ठ मित्र की इकलौती लड़की मात्र उन्नीस वर्ष की आयु में गुजर गयी। उसे अचानक पेट में दर्द हुआ और उसके बाद हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया और मात्र छ: घंटे के अंदर उसका देहांत हो गया। हमारे मित्र ने अपने और अपने परिवार के किसी सदस्य को कोरोना वायरस का टीका भी नहीं लगवाया था कि सारा दोष उसे दे दिया जाए कि उस टीका के प्रभाव से अचानक मृत्यु हो गयी। जो आज हो रहा है वो सब पहले भी होता रहा है। आज सबके हाथ में मोबाइल है, चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिसके कारण ये दुर्घनाएं रेकॉर्ड हो जा रही हैं।
हमारे मित्र की तो पूरी दुनिया ही उजड़ गयी। उस समय शनि के मीन राशि में गोचर को भी दोष नहीं दे सकतें, क्योंकि वो फरवरी में आया ही नहीं था। उनकी व्यक्तिगत कुण्डली में संतान वियोग के बाद वैरागियों जैसे जीवन का योग था। वही अपने समय पर घटित हो रहा है। मेरी कुण्डली में 23 मई 2024 से 29 अप्रैल 2025 तक गुरु की महादशा में केतु का अन्तरदशा चल रहा है। सामान्यतः वैदिक ज्योतिष के अनुसार, तुला लग्न के लिए यह समय बहुत अशुभ माना जाता है, लेकिन मेरे जीवन के सबसे अधिक शुभ समय में से यह एक रहा है। इस बीच, मैंने सुदूर तीर्थों का जो आनंद उठाया, वैसा जीवन में पहले कभी नहीं उठा पाया था। इसी समय ने पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज के हृदय में मेरे लिए विशेष स्थान बनवाकर उनका कृपापात्र बनवा दिया।
अभी 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश के पहलगाम पर्यटनस्थल पर हिन्दुओं पर जो आतंकवादी हमला हुआ है, उस पर आने से पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ग्रहों की दृष्टि से यह जितना अशुभ दिन था उससे भी अधिक अशुभ दिन 12-13 अप्रैल 2025 के आसपास का समय था। 9 अप्रैल 2025 को तो मीन राशि पर शनि, राहु, बुध, शुक्र व सूर्य न सिर्फ जमा हो गये थें, बल्कि शनि, राहु, बुध और शुक्र चारों ग्रह पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर एक दूसरे के बहुत निकट आ गये थें। नवमांश कुण्डली में ये सभी ग्रह मंगल के साथ कर्क राशि में जमा हो गये थें। मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर ही डर गया था कि कुछ तो गड़बड़ होगा और लखनऊ पहुँचकर अगले दिन बुरी तरह मेरा शरीर कोलैप्स कर गया था। 10 अप्रैल को योगी जी से मिलने के लिए आया था और बिस्तर से उठ ही नहीं पा रहा था।
उस दिन असहाय अवस्था में मुझे तो एक बार सारे देवता-पितर पर संशय हो गया था। मैं मन ही मन सोचने लगा, "दतिया में माँ पीताम्बरा की कोई विशाल प्रतिमा भी नहीं है, एक छोटी से मूर्ति है। निस्संदेह! उसकी एक ऊर्जा होगी, लेकिन वो ऊर्जा इतनी विराट नहीं होगी जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नियंत्रित करती हो। मैं ही मूर्ख अपनी कल्पना में माँ की इतनी विराट छवि बना रखा हूँ, जैसे वो त्रिभुवन की अधिष्ठात्री हो। मैं यहाँ कुत्ते-बिल्ली की तरह गुमनाम मर भी जाऊँ तो उसे कोई परवाह नहीं है।"
12 अप्रैल को मेरी योगी आदित्यनाथ जी से बहुत अच्छी मुलाकात होने के बाद मैं बहुत लज्जित हुआ कि यह सिर्फ मेरी योग्यता के कारण नहीं हुआ है, बल्कि माँ की कृपा के कारण ऐसा हुआ है। मेरी ऐसी भावना थी कि मुझे महाराज जी से कोई सांसारिक उपलब्धि नहीं चाहिए था। मैं जो कुछ कर रहा हूँ वो अपनी आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए कर रहा हूँ। यदि महाराज जी मेरे साथ कठोरता का व्यवहार करते तो शायद मैं फिर उनके पास कभी नहीं जा पाता। लेकिन मेरी पवित्र भावना को महाराज जी तक माँ बगलामुखी ने ही पहुँचाया। अपने महाराज जी तो करुणासिन्धु हैं ही। हमलोगों ने देखा कि पहलगाम आतंकवादी हमला में मारे गये कानपुर के शिवम द्विवेदी के परिजनों से मिलकर वापस आते समय वे द्रवीभूत होकर अपने अश्रु पोंछने लगें।
मैं जगतजननी के प्रति संशय के लिए लज्जित अनुभव करने लगा और इसी अवस्था में ही अपना सिर झुकाए नितिन कन्नौजिया और गोविन्द के साथ नैमिषारण्य चला गया। नैमिषारण्य में खड़े हनुमान जी वाला हनुमान गढ़ी है। लेटे हनुमान गढ़ी प्रयागराज में और बैठे हनुमान गढ़ी अयोध्या में तो कई बार दर्शन हुआ था, लेकिन नैमिषारण्य में खड़े हनुमान गढ़ी के दर्शन के साथ इसमें पूर्णता आ गयी। उसके बाद माँ ललिता देवी के बालरूप का दर्शन किया। इस शक्तिपीठ में सती का हृदय गिरा था। मैं वहाँ मन्दिर में आगे भीड़ से हटकर पीछे जाकर शान्ति से खड़ा होना चाहता था। गोविन्द ने कहा कि माँ की प्रतिमा छोटी है, पीछे से नहीं दिखेगा। मैं इतने मन्दिरों में गया हूँ, कभी किसी जगह यह शब्द सुनने को नहीं मिला कि प्रतिमा छोटी है। माँ ने जानबूझकर गोविन्द के मुँह से वही शब्द उच्चारित करवाया जो दो दिन पहले मेरे मन चल रहा था। मैं माँ की लीला देखकर सकुचा रहा था।
मुझे अचानक से याद आया कि आज तो हनुमान जयंती है और मेरा हिन्दी तिथि से जन्मदिन है। परमात्मा प्रत्येक वर्ष अनजाने में ही मुझे अपने किसी बड़े मन्दिर में बुलाकर मेरा जन्मदिन मनाता है कि राहुल अकेला है, इसका जन्मदिन मैं ही सेलिब्रेट कर दूँ। 2024 में अनुज सोनू को कश्मीरी गेट के मरघट वाले हनुमान जी के मंदिर ले गया था। वहाँ भीड़भाड़ देखकर पता चला कि आज हनुमान जयंती है। 2023 में मैं माँ कामख्या मन्दिर के प्रांगण में बैठकर चन्द्रमा को देखा तो याद आया कि यह तो पूर्णिमा है और मेरा जन्मदिन है। यदि मैं 10 अप्रैल को योगी जी से मिल लिया होता तो 11 अप्रैल को दिल्ली आ गया होता, लेकिन पूर्णिमा पर तो माँ को अपने पास बुलाना था। मैं माँ की ऐसी कृपा देखकर जमीन में शर्म से गड़ा जा रहा था।
जब मैं 12 अप्रैल को रात 8 बजकर 40 मिनट पर माँ ललिता देवी का दर्शन कर रहा था और जब मैं 22 अप्रैल दिन में 3 बजे हिमाचल प्रदेश में माँ चामुण्डा मन्दिर में दर्शन कर रहा था; दोनों ही समय ग्रहों की दृष्टि से विध्वंसक समय थी, लेकिन 22 अप्रैल की तुलना में 12 अप्रैल को ग्रह अधिक विध्वंसक स्थिति में थें। यहाँ से बिलकुल चौकन्ना होकर लेख को पढ़िए। यदि आज यह बात आपको समझ में आ गया तो आगे आप जीवन में किसी ज्योतिषी के कितना भी डराने पर नहीं डरेंगे। मैं इनदोनों दिनों ही नहीं, बल्कि दोनों समय पर दो शक्तिपीठों पर माँ के सामने खड़ा था।
12 अप्रैल को शनि, राहु, बुध, शुक्र और सूर्य मीन राशि में थें और उनके ठीक सामने चन्द्रमा कन्या राशि में केतु के साथ व मंगल के नक्षत्र चित्रा पर था। 22 अप्रैल को शनि, राहु व शुक्र ही पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर था। बुध उससे बहुत दूर चला गया था। सूर्य तो अगले राशि मेष में चला गया था। चन्द्रमा मकर राशि में धनिष्ठा मंगल के नक्षत्र में था और कर्क राशि का मंगल उसे देख रहा था।
इनदोनों दिनों की ग्रहों की स्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर एक सामान्य आदमी को भी इतना समझ आ जाता है कि 9-13 अप्रैल को 22 अप्रैल से अधिक विध्वंसक स्थिति थी। उन दिनों में भी बहुतों के जीवन में उथलपुथल मचा होगा, लेकिन वे गुमनाम लोग हैं तो हमें उसकी जानकारी नहीं है। मैं अपना उदाहरण बार-बार इसलिए दे रहा हूँ कि चीजें स्पष्टता से समझ आ जाये। जैसे ग्रह मुझ पर भी असर कर रहे हैं, वैसे वे सभी पर कर रहे हैं। लेकिन उसकी तीव्रता उनके व्यक्तिगत ग्रहों की स्थिति के अनुरूप घटित होगा।
12 अप्रैल को जब मैं माँ ललिता देवी के सामने खड़ा था तब चन्द्रमा मंगल के नक्षत्र में राहु के उपनक्षत्र में था और जब 22 अप्रैल को दिन में तीन बजे मैं हिमाचल प्रदेश के माँ चामुण्डा के सामने खड़ा था, तब भी चन्द्रमा मंगल के नक्षत्र में राहु के उपनक्षत्र में था। मंगल और राहु मेरी कुण्डली में अंगारक योग बना रखे हैं। यह अशुभ योग है, लेकिन मैंने देखा है कि भगवती के उग्र रूप की उपासना के लिए यह बहुत शुभ स्थिति है। यह समय राजनीति से संबंधित कार्यों के लिए शुभ फलदायक रहा है। इसलिए इस अशुभ ग्रहों की स्थिति में मैं हिमाचल प्रदेश चला गया था और मात्र दो दिनों में ज्वाला माता, चिन्तपूर्णी माता, चामुण्डा माता और ब्रजेश्वरी माता- चार शक्तिपीठों का दर्शन किया।
माँ चामुण्डा मन्दिर में कार्य चल रहा था, इसलिए हमलोगों के लिए बहुत दूर से दर्शन की व्यवस्था थी। मैं जब तीन बजे वहाँ पहुँचा तब वहाँ के भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार अपने दस-बारह कार्यकर्ताओं के साथ दर्शन कर रहे थें। उनके दर्शन करने के बाद भी उनके कार्यकर्ताओं के लम्बे समय तक सामने खड़े होने के कारण हमलोग दर्शन नहीं कर पा रहे थें। मन्दिर खाली था, लेकिन सुरक्षाकर्मी हमें भीतर नहीं जाने दे रहा था। स्नेह शर्मा दीदी ने प्रार्थना की कि ये बहुत दूर से आये हैं, कम से कम इन्हें दर्शन करने दीजिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
मैं निराश हो गया। मेरे मन में आया कि मंगल-राहु में शक्ति स्थानों पर तो व्यवधान नहीं होता है, आज कहाँ फँस गया। उसके बाद राम तीर्थ शर्मा जी और अन्य एक दर्शनार्थी नाराजगी व्यक्त करते हुए भीतर प्रवेश कर गयें और मुझे भीतर प्रवेश करवा दिया, उसके बाद सभी लोग भीतर चले आयें। फाइनली माँ का बहुत अच्छे से दर्शन हो गया। यहाँ ध्यान रखनेवाली बात है कि यदि ये विष्णु, शिव, गणपति आदि का मन्दिर होता तो इस अशुभ समय में मैं दर्शन से वंचित रह जाता। इसी प्रकार के सैंकड़ों बार के मेरे व्यक्तिगत अनुभव के कारण मैं ऐसे पापी ग्रहों से पीड़ित लोगों से शक्ति की उपासना करवाता हूँ।
संयोगों की बात करें तो जहाँ 12 अप्रैल को प्रयागराज व अयोध्या के बाद तीसरे नैमिषारण्य के हनुमान गढ़ी के दर्शन का क्रम पूर्ण हुआ वहीं 22 अप्रैल को दतिया, नलखेड़ा के बाद कांगड़ा में माँ बगलामुखी के दर्शन का क्रम पूर्ण हुआ। उसी दिन मैंने वहाँ मीठा, कड़वा व तांत्रिक- तीनों विधियों से माँ बगलामुखी का सम्पूर्ण हवन किया। एक संयोग यह रहा कि स्नेह दीदी ने अपनी जिस बेटी की विवाह के लिए सात वर्ष पहले अप्रैल 2017 में उसकी कुण्डली दिखवायी थी और मेरे मार्गदर्शन के बाद अपनी बच्ची का इंगेजमेंट 22 अप्रैल को ही किया था। आश्चर्य है कि मैं उसी दिन को इनदोनों को अपने साथ बैठाकर हवन कर रहा था।
इसी तथाकथित अशुभ समय में जब माँ बगलामुखी के हवन, दर्शन आदि के बाद शर्मा जी और स्नेह दीदी मुझे स्टेशन छोड़ने आ रहे थें तब मेरे घर से फोन आने लगा कि एक बहन शालिनी का इंगेजमेंट और विवाह का शुभ मुहूर्त निकालकर तुरन्त बताओ। मुझे आश्चर्य हुआ कि माँ बगलामुखी का आशीर्वाद तो है वो ठीक है लेकिन अचानक सब अरेंज कैसे हो गया। दो दिन पहले मेरे एक मौसेरे भाई के विवाह में जाने के लिए चाचा का पूरा परिवार रेल में बैठ गया था। चाचा की एक लड़की शालिनी का जिस परिवार में विवाह की बात चल रही थी, वे लोग भी मौसेरे भाई का विवाह अटेंड करने जा रहे थें।
मेरी मम्मी को स्टेशन पहुँचने में कुछ मिनटों की देरी हो गयी। छोटे भाई सोनू और अनिकेत मेरी मम्मी को पकड़कर दौड़ रहे थें और ट्रेन स्टार्ट हो गया। शालिनी ने खिड़की से जब देखा कि मम्मी ट्रेन नहीं पकड़ पायेंगी तो उसने अकेले चेन खींचकर ट्रेन रोक दिया। मम्मी तो ट्रेन में चढ़ गयीं, लेकिन दस-बारह रेलवे के पुलिस, स्टॉफ, अधिकारी सब वहाँ पहुँच गयें। आंटी ने देखा कि पुलिस शालिनी को ट्रेन से उतारकर ले जाना चाह रही है तो उन्होंने अपने बेटे अनिकेत का नाम बता दिया कि उसने ट्रेन रोका था। पुलिस सोनू और अनिकेत को अगले दिन कोर्ट में आने के लिए बहुत देर तमाशा करने के बाद अंत में बारह सौ रुपये फाइन लेकर छोड़ी।
जब मुझे यह सब पता चला तो मैं शालिनी को बहुत डांटने लगा यह बोलते हुए कि तुम्हें दबंगई दिखाकर ट्रेन रोकने की क्या आवश्यकता थी। लड़के का पिता पुलिस अधिकारी है। वो ऐसी दबंग लड़की को अपनी बहू कभी नहीं बनायेगा। मैंने उसे खूब सुनाया कि तुम्हें डरी, सहमी, दबी, कुचली लड़की की तरह अपने को प्रजेंट करना चाहिए था। शालिनी सफाई दे रही थी कि मैंने कोई दबंगई नहीं दिखाई, मैं बड़ी मम्मी को दौड़ते नहीं देखती तो कोई बात नहीं होती, लेकिन उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर पैनिक हो गई और उसी अवस्था में ट्रेन का चेन खींचकर उसे रोक दी। मैं उसके एक्सक्यूज नहीं सुना और नाराज होकर कॉल काट दिया।
मुझे बाद में पता चला कि उसकी होनेवाली सास वहीं बैठी थी और वो शालिनी पर बहुत प्रसन्न हो गई कि यह तो बहुत बहादुर बच्ची है, जब ये अपनी चाची के लिए घबराहट में ट्रेन रोक दी तो मेरे लिए भविष्य में ये धरती-आसमान एक कर देगी। अब इसे क्या कहियेगा? इस समय ग्रह पैनिक सिचुएशन क्रियेट कर दे रहे हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इससे केवल अशुभ घटना ही घटेगी। इसके शुभ फल भी देखने को मिल रहे हैं।
हमलोग 12 अप्रैल और 22 अप्रैल के गोचर की तुलना कर रहे थें। मन में एक प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब 12 अप्रैल का गोचर ज्यादा खतरनाक था तो उस समय पहलगाम पर हमला क्यों नहीं हुआ। यहाँ यह बात अच्छे से समझ लीजिए कि ऐसे ग्रहों के गोचर हमेशा बनते रहते हैं और व्यक्तिगत रूप से लोगों का जीवन अपनी कुण्डली के अनुसार प्रभावित होता रहता है। चूँकि हम प्रत्येक व्यक्ति की कुण्डली पर इसके प्रभावों का परीक्षण नहीं कर रहे होते हैं तो हम इससे बेखबर रहते हैं। मेरी इस वर्ष की वर्ष कुण्डली में बहुत तगड़ा राजयोग का निर्माण हो गया था तो वो मेरे पाँच पुस्तकों के पब्लिकेशन के कार्य को गति देते हुए योगी आदित्यनाथ जी तक पहुँचा दिया। यह बुरा समय तो मेरे लिए अत्यंत शुभ हो गया, क्योंकि मेरी वर्ष कुण्डली के साथ 29 अप्रैल 2025 से पाँच वर्षों के लिए दशायें भी यश-कीर्ति की वृद्धि करनेवाली बन गयी है।
मैं दिसम्बर 2024 में जबसे काशी होकर आया हूँ, ऐसा लगता है कि मात्र चालीस-पैंतालीस प्रतिशत ही बाहर हूँ, पचपन-साठ प्रतिशत कहीं और हूँ। पता नहीं कहाँ हूँ, लेकिन कहीं ठहर सा गया हूँ। इंद्रियों की चपलता मद्धिम होती जा रही है। अब पहले जैसा बहुत क्रोध नहीं आता है। मस्तिष्क भी ठहर सा गया है। किसी को बता नहीं पाता हूँ। कभी-कभी लगता है कि कहीं लेखन के लिए मस्तिष्क के तीव्र चिंतन की क्षमता अचानक समाप्त न हो जाए, अन्यथा पुस्तक का काम भी अधूरा रह जायेगा। आज यह लेख लिखने में भी बहुत दम लग गया है। एक ऐसी मन:स्थिति में जी रहा व्यक्ति असंभव सा लगनेवाला कार्य साध देता है तो यह सब ईश्वर की कृपा है और कुण्डली के जुझारू ग्रहों का प्रताप है।
अब तक आप अच्छे से समझ चुके हैं कि केवल ग्रहों का गोचर अकेले भला या बुरा कुछ नहीं कर सकता। इसके लिए आपकी कुण्डली के अन्य पहलुओं पर विचार करना पड़ेगा। अभी का पहलगाम आतंकवादी हमला भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साख पर हुआ है। इसलिए जब तक उनकी दशा खराब नहीं चलेगी, तब तक यह होना संभव नहीं है।
नरेन्द्र मोदी जी की कुण्डली में मंगल की महादशा में शनि की अन्तरदशा में केतु की प्रत्यंतर दशा 19 अप्रैल 2025 से 12 मई 2025 तक चल रही है। ये तीनों बहुत खतरनाक और युद्ध के ग्रह हैं। 19 अप्रैल से पहले मोदी पर हमला नहीं हो सकता था। यह हमला विदेश से प्रायोजित भारत पर हुआ है। स्वतंत्र भारत की कुण्डली के बारहवें भाव में मेष राशि में सूर्य 14 अप्रैल 2025 से 14 मई 2025 तक रहेगा। इसमें भी सूर्य 14-27 मई तक अश्विनी केतु के नक्षत्र में गोचर कर रहा है और केतु भारत की कुण्डली के सप्तम मारक भाव में युद्ध की वृश्चिक राशि पर बैठा हुआ है। अर्थात भारत की कुण्डली से 14 अप्रैल से पहले और नरेन्द्र मोदी जी की कुण्डली से 19 अप्रैल से पहले हमला नहीं हो सकता था। 22 अप्रैल को ये सारी शर्तें आपस में सहयोगी बन गयीं, इस कारण यह हमला हो पाया।
यह भाजपा के साख पर भी हमला है। जम्मू और कश्मीर को लेकर इनकी स्थिति इंडिया शाइनिंग वाली न हो जाए। कश्मीरी पंडित अपनी लगातार उपेक्षा के कारण लम्बे समय से नाराज हैं। द कश्मीर फाइल्स की नायिका भाषा सुंबली के पिता डॉ. अग्निशेखर जैसे कश्मीरी बुद्धिजीवियों की पीड़ा देखकर देश उद्वेलित हो रहा है। सारे देशवासियों को ऐसा लग रहा है कि जम्मू और कश्मीर के विषय पर उनसे बहुत कुछ छिपाया गया है। लोगों की नजर में ऐसे भरोसा खोना भाजपा के लिए सही नहीं है। भाजपा की वर्ष कुण्डली में भी दसवें और बारहवें भाव में परिवर्तन के दैन्य योग के साथ नागदोष बना हुआ था। मुझे आशंका थी कि इस वर्ष भाजपा के साथ कोई अनहोनी होगी। मुझे लगा था कि किसी वरिष्ठ भाजपा नेता पर कोई मुसीबत आ सकती है।
मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि पाकिस्तान की इतनी हिम्मत हो जायेगी कि वो नरेन्द्र मोदी जी से टकराने की जुर्रत करेगा। नरेन्द्र मोदी जी को पूरी दुनिया आजमाना चाह रही है। उनके जन्म के राहु पर शनि गोचर कर रहा है। आनेवाले समय में उनके जन्म के गुरु पर राहु और जन्म के शनि पर केतु गोचर करनेवाला है। इन पापी ग्रहों ने उन्हें दबोच लिया है। यदि वे अगले डेढ़ वर्ष में इन विपरीत परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं कर पायें तो इनके कीर्ति पर ग्रहण लग जायेगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस भीषण आपदा को वे एक अवसर की तरह लेंगे। पूर्व में, नितिन कामथ के साथ पोडकास्ट पर भी नरेन्द्र मोदी जी कह चुके हैं कि उनके रिस्क टेकिंग कैपेसिटी का फूल युटेलाइजेशन अभी हुआ ही नहीं है। यदि यह सच है तो अब वो समय आ गया है कि वे अपने जोखिम उठाने की क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और भारत के शौर्य का डंका पूरी दुनिया में बजा दें।
Rahul Singh Rathore
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