कुछ लोग कहते है आज़ादी गांधी के चरखे से नही मिली बल्कि उसमे मंगल पाण्डेय भगत सिंह , चन्द्रशेखर आज़ाद , सुभाषचंद्र बोस, जैसे अनगिनत बलिदानियों का योगदान रहा । गांधी जी का चरखा आन्दोलन महज एक दिखावा था , गांधी जी अंग्रेजों से मिले हुए थे , गांधी जी चाहते तो देश को बंटवारे से बचाया जा सकता था आदि ।
इतेफाक से मैं भी इन विचारों से सहमत हूं किन्तु क्या विचारों से सहमत होना ही परिणाम दिला देगा ?
आप खुद सोचे !
हम युवा राष्ट्रहित की बात करते है हमको रोजगार , अच्छी सड़के , निर्बाध बिजली , आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं , उच्च शिक्षा की व्यवस्था , सशक्त कानून , भ्र्ष्टाचार मुक्त शासन आदि चाहिए ।
इसके लिए करते क्या है हम ?
अभी वर्तमान सरकार ने SC / ST Act को राजनैतिक लाभ के लिए पुर्नस्तिथि में ला दिया है और हमारे बीच के कुछ युवा शांति पूर्ण ढंग से आन्दोलन कर रहे है ।
अरे मूर्खो भगत सिंह ने कहा था कि
"जब सरकारे बहरी हो तो अपनी आवाज पहुचाने के लिए बम फोड़कर आवाज सुनाओ " ।
परन्तु दुःखद हमारे युवा भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा भी लेता है और गांधी जी की तरह बिना लाठी खाये आज़ादी भी चाहता है ।
अगर आप वाकई में अपने देश से प्रेम करते है , आप समाज की विसंगतियो के लिए कुछ करना चाहते है तो आप सिर्फ अपने राष्ट्र धर्म को निभाइए । हमारे आस पास रोज ऐसी घटनाएं होती है जो देश और समाज के लिए हितकर नही होता है उसकी आलोचना करिये , सच के साथ आवाज बुलन्द कीजिए । अपने आस पास हो रहे अपराध , भ्रष्टाचार , कानून का उल्लंघन की बात सक्षम अधिकारी तक पहुचाइए ।
मैं ये जानता हूं कई लोग अपना तर्क देंगे , आपके तर्क सही हो सकते है परंतु जो मैं कह रहा हु उस पर मन्थन जरूर करिए ।
जय हिन्द जय भारत
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