ये एक तथ्य है कि दुनिया के किसी भी देश की पुलिस, प्रशासन, सरकार वहां की जनता को किसी भी अपराध का शिकार होने से बचा नही सकती.. अगर कोई आपके सीने में चाकू घोंप देना चाहता है तो तत्क्षण कोई पुलिस वाला अचानक से वहां प्रकट होकर उस व्यक्ति का हाथ नही पकड़ लेगा..
अगर कोई कहता है कि सरकार इस मसले पर फेल हुई है तो वो झूठ बोलता है और जनता को बरगलाता है.. क्योंकि ये मनुष्यों की सरकार है, जादूगरों या अंतर्यामियों की नही..
पर सरकार के हाथ मे दूसरे रास्ते होते हैं.. सरकार होता हुआ अपराध नही रोक सकती, पर अपराध हो ही ना ऐसा माहौल बना सकती है.. कम से कम ऐसा तो कर ही सकती है कि समाज के किसी गुट को अपराध करने का मनोबल न बढ़े..
छठवें साल में पहुच गई इस सरकार ने भारत मे बहुत विकास किया, दुनिया मे देश का मान सम्मान बढ़ाया.. देश की सुरक्षा व्यवस्था भी काफी मजबूत हुई..
पर देश मे आंतरिक माहौल अभी भी भयावह है.. बल्कि और भयावह होता जा था है.. क्योंकि सरकार के स्तर पर अब तक सभी संभाषण, उद्बोधन "125 करोड़ देशवासियों" के लिए होते थे.. पर,
नई सरकार बनने के तुरन्त बाद केवल "अल्पसंख्यको" का विश्वास जीतने का प्रयास होगा ऐसी बात कही जाने लगी.. सभी सांसदों को ऐसा लेक्चर पिलाया गया.. पर हैरानी एक बात की होती है कि इन्होंने ऐसा अपने मन से ही कैसे मान लिया कि "बाकी सभी समुदायों" के विश्वास इन्हें प्राप्त है ही ?..
बस इसलिए कि आपको भर-भरकर वोट मिले ?.. आप ये बात समझ लीजिए कि आपको मिले 50% वोट राजनीति में व्याप्त विकल्पहीनता के कारण मिले हैं न कि "सबका विश्वास" आप पर होने के कारण..
आपको "सबका विश्वास" जीतना अभी भी बाकी है.. केवल एक समुदाय की बात आप कब से करने लगे.. ये आप ही थे न जिससे किसी पत्रकार ने जब पूछा कि "आपने गुजरात के मुसलमानों के लिए क्या किया ?".. तो आपका जवाब था कि "कुछ नही.. और कुछ करूँगा भी नही... क्योंकि मैं सारे गुजरातियों के लिए करता हूँ.. क्या सड़क बनेगी तो उसपर मुसलमान नही चलेगा क्या ?"..
पर आप नई सरकार के अपने पहले उद्बोधन में ही एक खास समुदाय, एक खास वर्ग की बात करने लगे..
जब आप किसी खास वर्ग की बात करते हैं तो समाज मे हलचल होती है..
वो वर्ग स्वयं को आपका "वरद-हस्त" प्राप्तकर्ता समझने लगता है.. फिर वो अपने एजेंडे पर लग जाता है क्योंकि आप तो हैं ही उनके साथ.. पिछली सरकार में वो वर्ग आपकी मनःस्थिति पहले ही भांप चुका है कि उनसे सम्बंधित एक जरा सी घटना को भी आप स्वयं किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर का बवाल बना देते हैं..
इस बार आपने शुरुआत में ही उन्हें संकेत दे दिया कि इस बार भी preference आपको ही दिया जाएगा..
पिछले कुछ दिनों में जो हुआ है वो सीधे आपकी जिम्मेदारी है..
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