विवाह से पूर्व कुण्डली मिलान करते समय जीवन साथी की कुण्डली के सप्तम भाव एवं सप्तमेश की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए, इसी से ज्ञात होता है कि पत्नी या पति कैसा होगा :
#कैसे_मिले_रूपवती_पत्नी_और_धनवान_पति :
विवाह के संदर्भ में कन्या की आकांक्षा धनवान पति और वर की कामना सुंदर पत्नी की होती है ! दोनों के माता-पिता भी कुण्डलियों के मिलान के साथ बहू या दामाद के बारे में सौंदर्य और धन को प्राय: केंद्र में रखते हैं ! आइए जानें कि किन योगों में सुंदर पत्नी और धनवान पति प्राप्त होता है —
. यदि वर की कुण्डली के सप्तम भाव में वृषभ या तुला राशि होती है तब उसे सुंदर पत्नी मिलती है ! यदि कन्या की कुण्डली में चन्द्र से सप्तम स्थान पर शुभ ग्रह बुध, गुरु, शुक्र में से कोई भी स्थित हों तब उसका पति राज्य में उच्च पद प्राप्त करता है तथा धनवान होता है !
#वर_की_कुण्डली_में_सुंदर_पत्नी_के_योग :
1. जब सप्तमेश सौम्य ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, सोम) होता है तथा स्वग्रही होकर सप्तम भाव में ही स्थित होता है तब जातक को सुंदर, आकर्षक, प्रभामण्डल से युक्त एवं सौभाग्यशाली पत्नी प्राप्त होती है ! जब सप्तमेश सौम्य ग्रह होकर भाग्य भाव में स्थित होता है तब जातक को शीलयुक्त, रमणीय एवं सुंदर पत्नी प्राप्त होती है तथा विवाह के पश्चात जातक का निश्चित ही भाग्योदय होता है !
2. जब सप्तमेश एकादश भाव में स्थित हो तब जातक की पत्नी रूपवती, संस्कारयुक्त, मृदुभाषी व सुंदर होती है तथा विवाह के पश्चात जातक की आय में वृद्धि भी होती है, या पत्नी के माध्यम से उसे आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं !
3. यदि जातक की जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में वृषभ या तुला राशि होती है तब जातक को चतुर, मृदुभाषी, सुंदर, सुशिक्षित, संस्कारवान, तीखे नाक-नक्श वाली, गौरवर्ण, संगीत, कला आदि में दक्ष, भावुक एवं चुंबकीय आकर्षण वाली, कामकला में प्रवीण पत्नी प्राप्त होती है !
4. यदि जातक की जन्म कुण्डली में सप्तम भाव में मिथुन या कन्या राशि उपस्थित हो तब जातक को कोमलाङ्गी, आकर्षक व्यक्तित्व वाली, सौभाग्यशाली, मृदुभाषी, सत्य बोलने वाली,नीति एवं मर्यादाओं से युक्त बात करने वाली, कठिन समय में पति का साथ देने वाली तथा सदैव मुस्कुराती रहने वाली पत्नी मिलती है ! उन्हें वस्त्र आभूषण एवं शौक श्रंगार करना बहुत प्रिय होते हैं !
5. जिस जातक के सप्तम भाव में कर्क राशि स्थित होती है, उसे अत्यंत सुंदर, भावुक, कल्पनाप्रिय, मधुरभाषी, लम्बे कद वाली, छरहरी तथा तीखे नाक-नक्श वाली, सौभाग्यशाली तथा वस्त्र एवं आभूषणों से प्रेम करने वाली पत्नी मिलती है !
6. यदि किसी जातक की जन्मकुण्डली के सप्तम भाव में कुम्भ राशि स्थित हो तब ऐसे जातक की पत्नी गुणों से युक्त धार्मिक, आध्यात्मिक कार्यो में गहरी अभिरुचि रखने वाली एवं दूसरों की सेवा और सहयोग करने वाली होती है !
7. सप्तम भाव में धनु या मीन राशि होने पर जातक को धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पुण्य के कार्यो में रुचि रखने वाली, सुंदर, न्याय एवं नीति से युक्त बातें करने वाली, वाकपटु, पति के भाग्य में वृद्धि करने वाली, सत्य का आचरण करने वाली और शास्त्र एवं पुराणों का अध्ययन करने वाली पत्नी प्राप्त होती है !
#वधू_की_कुण्डली_में_धनवान_पति_के_योग :
1. जिस कन्या की जन्म कुण्डली के लग्न में चन्द्र, बुध, गुरु या शुक्र स्थित होते हैं, उसे धनवान पति प्राप्त होता है !
2. जिस कन्या की जन्म कुण्डली के लग्न में गुरु स्थित हो उसे सुंदर, धनवान, बुद्धिमान पति व श्रेष्ठ संतान मिलती है !
3. भाग्य भाव में या सप्तम, अष्टम और नवम भाव में शुभ ग्रह होने से कन्या का ससुराल धनाढ्य एवं वैभवपूर्ण होता है !
4. कन्या की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा से सप्तम स्थान पर शुभ ग्रह बुध, गुरु, शुक्र आदि में से कोई उपस्थित हों तब उसका पति राज्य में उच्च पद प्राप्त करता है तथा उसे सुख व वैभव प्राप्त होता है !
5. यदि कन्या की कुण्डली के लग्न में चंद्रमा हो तब ऐसी कन्या पति को प्रिय होती है और चंद्रमा व शुक्र की युति हो तब कन्या ससुराल में अपार संपत्ति एवं समस्त भौतिक सुख-सुविधा प्राप्त करती है !
6. यदि कन्या की कुण्डली में वृषभ, कन्या, तुला लग्न हो तब वह ससुराल में प्रशंसा पाती है, उसे धनवान पति एवं ससुराल में प्रतिष्ठा भी प्राप्त होता है !
7. जिस कन्या की कुण्डली में जितने अधिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुद्ध, चन्द्र) की दृष्टि लग्न या सप्तम भाव पर होती है, उसे उतना ही धनवान एवं प्रतिष्ठित परिवार एवं पति प्राप्त होता है !
8. कन्या की जन्म कुण्डली में लग्न एवं ग्रहों की स्थिति की गणनानुसार त्रिशांश कुण्डली का निर्माण करना चाहिए तथा देखना चाहिए कि यदि कन्या का जन्म मिथुन या कन्या लग्न में हुआ है तथा लग्नेश गुरु या शुक्र के त्रिशांश में है तब उसके पति के पास अकूत सम्पत्ति होती है तथा कन्या सदैव ही सुंदर वस्त्र एवं आभूषण धारण करने वाली होती है !
9. यदि कुण्डली के सप्तम भाव में शुक्र उपस्थित होकर अपने नवमांश अर्थात वृषभ या तुला के नवमांश में हों तब पति धनाढ्य होता है !
10. सप्तम भाव में बुद्ध होने पर पति विद्वान, गुणवान, धनवान होता है, गुरु होने से दीर्घायु, राजा के समान सम्पत्ति वाला एवं गुणी तथा शुक्र या चंद्रमा स्थित हो और अस्त या नीच का न हो तब ससुराल पक्ष धनवान एवं वैभवशाली होता है !
11. यदि एकादश भाव में वृष, तुला राशि हो या इस भाव में चन्द्र, बुद्ध या शुक्र स्थित हों तब ससुराल धनाढ्य और पति सौम्य व विद्वान होता है !
#कुछ_विशेष_स्थिति :
1. हर पुरुष सुंदर पत्नी की कामना करता है वहीं स्त्री धनवान पति की कामना करती है ! लेकिन यह तभी सम्भव है, जब उनकी जन्म कुण्डली में ग्रहों का योग उत्तम हो ! कुण्डली पर पड़ रही ग्रहों की दृष्टि और लग्न योग ही बताते हैं कि पत्नी कितनी रूपवान और पति कितना धनवान होगा !
2. यदि जातक की जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में सूर्य हों तब उसकी पत्नी शिक्षित, सुशील, सुंदर एवं कार्यो में दक्ष होती है, किंतु ऐसी स्थिति में सप्तम भाव पर यदि किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तब दाम्पत्य जीवन में कलह और सुखों का अभाव होता है !
3. यदि जातक की जन्म कुण्डली में स्वगृही, उच्च या मित्र क्षेत्री चंद्रमा हो तब जातक का दाम्पत्य जीवन सुखी रहता है तथा उसे सुंदर, सुशील, भावुक, गौरवर्ण एवं सघन केश राशि वाली रमणी पत्नी प्राप्त होती है ! सप्तम भाव में क्षीण चंद्र दाम्पत्य जीवन में न्यूनता उत्पन्न करता है !
4. जब जातक की कुण्डली में सप्तमेश केंद्र में स्थित हों तथा उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो, तब जातक को गुणवान, सुंदर एवं सुशील पत्नी प्राप्त होती है !
5. पुरुष की जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में शुभ ग्रह बुद्ध, गुरु या शुक्र स्थित हों तब ऐसा जातक सौभाग्यशाली होता है तथा उसकी पत्नी सुंदर, सुशिक्षित होती है और कला, नाट्य, संगीत, लेखन, संपादन में प्रसिद्धि प्राप्त करती है ! ऐसी पत्नी सलाहकार, दयालु, धार्मिक-आध्यात्मिक क्षेत्र में रुचि भी रखती है !
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