मुखी रुद्राक्ष साक्षात् रूद्र अवतार है ! इसके अधिपति गृह ब्रहस्पति देव है ! इसलिए ज्योतिष के अनुसार ब्रहस्पति कमजोर होने पर पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाना चाहिए ! जो सच्चे शिवभक्त होते है उन्हें पांच मुखी रुद्राक्ष की माला अवश्य धारण करनी चाहिए ! पांच मुखी रुद्राक्ष के प्रति भगवान शिव का विशेष लगाव है इसके साथ ही पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भगवान श्री विष्णु , भगवान गणेश, सूर्य देव और माँ भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है !
पांच मुखी रुद्राक्ष पूरी दुनिया में सबसे अधिक पैदा होते है ! इसलिए यह बहुत ही सामान्य रूप से प्राप्त हो जाते है ! अन्य रुद्राक्षों की अपेक्षा ये नकली या बनावटी बहुत ही कम मिलते है ! असली रुद्राक्ष सदैव प्रभावी होते हैं, चाहे वह कितने भी मुख के क्यों न हो !
#पाँचमुखी_रुद्राक्ष_के_लाभ : –
पांच मुखी रुद्राक्ष में पंचदेवों की कृपा का वास है इसलिए पंच तत्व जनित दोषों को दूर करने में पांच मुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व है !
मेष , धनु, और मीन राशि के जातकों को पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने पर विशेष लाभ प्राप्त होता है !
नकारात्मक उर्जा व मन में नकारात्मक भाव से बचाने में पांच मुखी रुद्राक्ष एक कवच के रूप में कार्य करता है !
पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से हर प्रकार के मानसिक विकार , मधुमेह व रक्तचाप से मुक्ति मिलती है ! मानसिक विकार, मधुमेह व रक्तचाप दूर करने के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष के 3 या 5 मनके धारण किये जा सकते हैं ! वैसे 108 छोटे मनकों की माला धारण करनी चाहिए !
परिवार में सुख-शांति के लिए भी पांच मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाना चाहिए !
5 मुखी रुद्राक्ष की खासियत यह है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है ! जो आपके लिए आप की ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं !
#पाँच_मुखी_रुद्राक्ष_धारण_करने_की_विधि –
रुद्राक्ष आप कोई भी धारण करें, धारण करने से पहले रुद्राक्ष को पवित्र व अभिमंत्रित करना आवश्यक होता है ! इसको धारण करने हेतु विधिवत पूजन किया जाना चाहिए ! इसके पश्चात् अधिक से अधिक मंत्र जप द्वारा रुद्राक्ष को अभिमंत्रित किया जाना चाहिए ! पांच मुखी रुद्राक्ष को भी पहनने से पहले इसी प्रकार शुद्ध कर लेना चाहिए :—
सोमवार, शिवरात्रि या श्रावण मास के किसी भी दिन रुद्राक्ष धारण करने के लिए शुभ माने गये है ! सबसे पहले दूध-दही-शहद-घी-शक्कर के मिश्रण से रुद्राक्ष को स्नान कराये ! अब पवित्र गंगाजल से स्नान कराये और अब इसे पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर रख दे ! दीपक प्रज्वल्लित कर इस मंत्र का यथा संभव ाकम से कम 108 जप करें : "ॐ नमः शिवाय !" अंत में कुमकुम से तिलक कर भगवान शिव को अर्पित करें, ततपश्चात इसे प्रसाद स्वरूप शिवजी का स्मरण करते हुए अपने गले में धारण करना चाहिए !
#पाँचमुखी_रुद्राक्ष_को_सिद्ध_करने_की_विधि :
सिद्ध रुद्राक्ष धारण करने से रुद्राक्ष का प्रभाव 100 गुना अधिक बढ़ जाता है ! इसलिए जब कभी भी आप रुद्राक्ष धारण करने का मन बनाये तो पहले इसे सिद्ध कर लें या फिर किसी अच्छे पंडित द्वारा भी इसे सिद्ध करवा सकते है !
रुद्राक्ष को सिद्ध करने के लिए रुद्राक्ष की विधिवत पूजा के साथ-साथ "ॐ नमः शिवाय" मंत्र के 5000 संख्या में जप करें और अंत में हवन करें ! हवन में अधिक से अधिक आहुतियाँ "ॐ नमः शिवाय" मंत्र की दें ! हवन के अंत में रुद्राक्ष को 21 बार हवन के ऊपर से घुमाये व हवन की विभूति से स्वयं तिलक करें !
अब आपका रुद्राक्ष अभिमंत्रित और सिद्ध हो चुका है, इसे शिवजी का आशिर्वाद लेकर धारण कर सकते हैं !
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