Skip to main content

आठ मुखी रूद्राक्ष

शिवपुराण के अनुसार अष्टमुखी रुद्राक्ष भैरव महाराज का रूप माना जाता है ! जो लोग इस रुद्राक्ष को धारण करते हैं, वे अकाल मृत्यु से शरीर का त्याग नहीं करते हैं ! ऐसे लोग पूर्ण आयु जीते हैं ! वे लोग जो रोग मुक्त जीवन जीना चाहते हैं उनके लिए आठ मुखी रुद्राक्ष एकदम उपयुक्त है ! इस रुद्राक्ष के लिए मंत्र है— "ॐ हुम नम: !"

आठ मुखी रुद्राक्ष में कार्तिकेय, गणेश और गंगा का अधिवास माना जाता है ! राहु ग्रह की प्रतिकूलता होने पर भी इसे धारण करना चाहिए ! मोतियाविंद, फेफड़े के रोग, पैरों में कष्ट, चर्म रोग आदि रोगों तथा राहु की पीड़ा से यह छुटकारा दिलाने में सहायक है ! इसकी तुलना गोमेद से की जाती है ! आठ मुखी रुद्राक्ष अष्ट भुजा देवी का स्वरूप है ! यह हर प्रकार के विघ्नों को दूर करता है ! इसे धारण करने वाले को अरिष्ट से मुक्ति मिलती है। इसे सिद्ध कर धारण करने से पितृदोष दूर होता है। मकर और कुंभ राशि वालों के लिए यह अनुकूल है ! मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, कुंभ व मीन लग्न वाले इससे जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं !

#आठमुखी_रुद्राक्ष_के_लाभ_अभिमंत्रित_व_धारण_करने_की_विधि :

आठ मुखी रुद्राक्ष के प्रधान देव भगवान श्री गणेशजी को माना गया है ! इसे धारण करने से भैरव बाबा की भी कृपा प्राप्त होती है ! इसके साथ ही आठ मुखी रुद्राक्ष आठ दिशाओं और आठ सिद्धियों का नेतृत्व करता है ! जिस प्रकार हिन्दू धर्म में गंगा को बहुत ही  पवित्र माना गया है और गंगा में स्नान करने मात्र से सभी पाप दूर होते हैं उसी प्रकार आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भी सभी पाप दूर हो जाते हैं, विशेष रूप से जो लोग बहुत झूठ बोलते हैं, या चोरी आदि करते हैं ऐसे पाप यदि यह संकल्प लेकर धारण किया जाय कि दुबारा वैसा पाप पुनः नहीं करेंगे, तब इस रुद्राक्ष के धारण करने से स्वतः ही पूर्व के पाप कृत्य दूर होने लगते हैं !

#आठमुखी_रुद्राक्ष_के_लाभ : –

जो लोग भैरव बाबा की उपासना करते हैं, उन्हें इस रुद्राक्ष को अवश्य ही धारण करना चाहिए, किन्तु ध्यान दें इसे पूर्ण विधि अनुसार ही धारण किया जाना चाहिए और रुद्राक्ष की पवित्रता को बनाये रखना चाहिए तभी भैरव बाबा की कृपा प्राप्त हो सकती है !
आठमुखी रुद्राक्ष के अधिपति देव गणेश जी हैं ! इसलिए इसे धारण करने से ज्ञान, बुद्धि, धन, यश में वृद्धि के साथ-साथ पद में उन्नति के अवसर प्राप्त होते है !
आठ मुखी रुद्राक्ष को राहू ग्रह का मनका माना जाता है, इसलिए राहु जनित दोषों को दूर करने में भी आठ मुखी रुद्राक्ष का बड़ा महत्व माना गया है !
आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मन से हर प्रकार की इर्ष्या, द्वेष आदि दूर होते हैं और मन में सात्विक विचारों का जन्म होता है !
पैरों में दर्द, चर्म रोग और श्वास रोग में आठ मुखी रुद्राक्ष से लाभ प्राप्त होता है !
जो जातक इस रुद्राक्ष को धारण करते है उन पर किसी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं का असर नहीं होता व भूत-प्रेत टोना-टोटका से भी छुटकारा प्राप्त होता है !
आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने के उपरान्त किसी पराई स्त्री के साथ सम्बंध बनाने पर जातक गम्भीर पाप का भागी बनता है और रुद्राक्ष की शक्ति नष्ट हो जाती है !

आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने का मंत्र : –
आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से पहले अधिक से अधिक इस मंत्र के जप किये जाने चाहिए : – "ॐ हूं नमः" !
 
#आठमुखी_रुद्राक्ष_को_अभिमंत्रित_व_सिद्ध_करने_की_विधि : –

8 मुखी रुद्राक्ष को सिद्ध करने हेतु सर्वप्रथम रुद्राक्ष को पंचामृत ( दूध-दही-घी-शहद और गंगाजल के मिश्रण) से स्नान करायें ! इसके पश्चात् शुद्ध जल से स्नान करायें ! अब रुद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करायें ! इतना करने के उपरांत रुद्राक्ष को पूजास्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर रख दे ! अब दीपक प्रज्वल्लित करें व रुद्राक्ष की विधिवत पूजा करें (रुद्राक्ष को कुमकुम से तिलक करें, पुष्प अर्पित करें, अक्षत(चावल) अर्पित करें, मीठे का भोग लगाये) !

रुद्राक्ष पूजन के पश्चात् हाथ में जल लेकर परमपिता परमेश्वर से इस प्रकार आग्रह करें :

 – हे परमपिता परमेश्वर मैं (अपना नाम बोले) गोत्र(अपना गोत्र बोले) आठ मुखी रुद्राक्ष को अभिमंत्रित करने हेतु "ॐ नमः शिवाय " या "ॐ हूं नमः " (दोनों में से किसी एक मंत्र का जप करें) मंत्र के जप कर रहा हूं मुझे इस कार्य में सफलता प्रदान करें, मेरे कार्य में किसी प्रकार की कोई गलती हो गयी हो तो मुझे क्षमा करें ! ऐसा कहते हुए जल को नीचे जमीन पर छोड़ दे ! अब भगवान शिव का ध्यान करते हुए अधिक से अधिक संख्या में ॐ नमः शिवाय या ॐ हूं नमः मन्त्र के जप करें !

सम्बंधित जानकारियाँ : –
आठ मुखी रुद्राक्ष के लाभ एवं पहनने की विधि —
रुद्राक्ष पहनने के नियम :
रुद्राक्ष से पूर्ण लाभ प्राप्त करना है तब इन नियमों का पालन अवश्य करें —
 रुद्राक्ष की पूजा अभिमंत्रित, सिद्ध करने की सम्पूर्ण जानकारी, मंत्र जप पूर्ण करने के उपरांत आप वह स्थान छोड़ दें और रुद्राक्ष में धागा डालकर माला बना लें ! अब शिवमंदिर जाकर वहां विधिवत शिवलिंग की पूजा करें ! अंत में रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष को अपने गले में धारण करें ! रुद्राक्ष की पवित्रता को हमेशा बनाये रखें !

Comments

Popular posts from this blog

षोडष वर्ग कुण्डली एवम उसका फलित

षोडष वर्ग कुण्डली तथा उसका फलित : .      षोडश वर्ग का फलित ज्योतिष में विशेष महत्व है ! जन्मपत्री का सूक्ष्म अध्ययन करने में यह विशेष बहुत सहायक होते हैं ! इन वर्गों के अध्ययन के बिना जन्म कुण्डली का विश्लेषण अधूरा होता है ! क्योंकि जन्म कुण्डली से केवल जातक के शरीर, उसकी संरचना एवं स्वास्थ्य के बारे में ही विस्तृत जानकारी मिलती है, परन्तु षोडश वर्ग का प्रत्येक वर्ग जातक के जीवन के एक विशिष्ट कारकत्व या घटना के अध्ययन में सहायक होता है ! #षोडशवर्ग_किसे_कहते_है : .     हम जानते हैं कि अगर राशिचक्र को बराबर 12 भागों में बांटा जाय तब हर एक हिस्‍सा राशि कहलाता है ! सूक्ष्‍म फलकथन के लिए राशि के भी विभाग किए जाते हैं और उन्‍हें वर्ग कहते हैं ! वर्गों को अंग्रेजी में डिवीजन (division) और वर्गों पर आधारित कुण्‍डली (वर्ग चर्क्र) को डिवीजनल चार्ट (divisional chart) कह दिया जाता है ! वर्गों को ज्‍योतिष में नाम दिए गए हैं ! जैसे — .     यदि राशि को दो हिस्‍सों में बांटा जाय तब ऐसे विभाग को होरा कहते हैं ! इसी तरह यदि राशि के तीन हिस्‍से किये जायें तब उस...

शेयर बाजार में सफलता

शेयर मार्केट में सफलता के योग कुंडली में देखना एक महत्वपूर्ण विषय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव वित्तीय सफलता, विशेषकर शेयर मार्केट में, को निर्धारित करता है। नीचे कुछ मुख्य योग और ग्रह स्थिति दी गई हैं जो शेयर मार्केट में सफलता का संकेत देती हैं: 1. बुध ग्रह की स्थिति बुध ग्रह बुद्धि, तर्क, और व्यापार का कारक ग्रह है। यदि बुध मजबूत हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो व्यक्ति को व्यापार और शेयर मार्केट में सफलता मिलती है। बुध का दूसरे, पांचवें, नवें या ग्यारहवें भाव में होना शुभ माना जाता है। बुध पर शुभ ग्रहों (जैसे बृहस्पति या शुक्र) की दृष्टि हो तो और भी लाभकारी होता है। 2. ग्यारहवें भाव की स्थिति ग्यारहवां भाव लाभ और आय का भाव है। यदि ग्यारहवें भाव का स्वामी शुभ ग्रहों के साथ हो और अशुभ ग्रहों से मुक्त हो, तो शेयर मार्केट में सफलता के योग बनते हैं। ग्यारहवें भाव में बृहस्पति, शुक्र या बुध की स्थिति लाभकारी होती है। 3. पंचम भाव और निवेश योग पंचम भाव निवेश, सट्टा, और भविष्य के लाभ को दर्शाता है। पंचम भाव का स्वामी अगर लाभ स्थान ...

नक्षत्र और शरीर के अंग

.         #27_नक्षत्र_और_शरीर_के_अंग :  (Relation Between Nakshatra and Body Parts) : .   वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को भी शरीर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है ! सभी 27 नक्षत्र शरीर के किसी ना किसी अंग का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन अंगों से  सम्बंधित परेशानी भी व्यक्ति को हो जाती हैं ! जो नक्षत्र जन्म कुण्डली में पीड़ित होता है उससे सम्बंधित बीमारी व्यक्ति को होने की  सम्भावना बनती है अथवा जब कोई नक्षत्र गोचर में पीड़ित अवस्था में होता है,  तब उससे सम्बंधित अंग में परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है !  .       इस लेख के माध्यम से आज हम उन सभी नक्षत्रों व उनसे सम्बंधित शरीर के अंगों के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ इससे आपके मन में उठने वाले ऐसे प्रश्नो का समाधान हो जायगा ! मेरे कुछ शिष्य अक्सर यह जानना चाहते हैं कि कौन सा नक्षत्र शरीर के किस अंग का प्रतिनिधित्व करता है ! इससे उनका भी समाधान हो जायेगा ! #अश्विनी_नक्षत्र : अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु हैं ! यह पहला नक्षत्र है और इसलिए यह सिर के ...