नवमांश कुंडली के द्वारा जातक के जीवन साथी पर विचार करते है !
🔸नवमांश कुंडली का लग्नेश यदि मंगल हो तो जातक की स्त्री क्रूर तथा लड़ाकू होती है परन्तु यदि मंगल के साथ शुक्र भी हो तो जातक की स्त्री सुंदर होने के साथ साथ कुलता होती है !
🔸यदि नवमांश कुंडली का लग्नेश सूर्य हो तो जातक की स्त्री पतिव्रता होने के साथ साथ उग्र स्वाभाव की होती है !
🔸यदि नवमांश कुंडली का लग्नेश चन्द्रमा हो तो शीतल स्वाभाव की गौरवर्ण की व मिलन सर होती है !
🔸यदि नवमांश कुंडली का लग्नेश बुध हो तो कला में प्रवीण चतुर व ज्ञानवान होती है!
🔸यदि नवमांश कुंडली का लग्नेश गुरु हो तो जातक की स्त्री धार्मिक कार्यो में लगी रहने वाली बहूत अधिक पूजा पाठ करने वाली और अंत समय में गृहस्थ जीवन से विरक्त होने वाली होती है !
🔸यदि लग्नेश शुक्र हो तो जातक की स्त्री सुंदर होने के साथ साथ श्रंगार प्रिय विलासी और प्रत्येक कार्य को निपुणता से करने वाली होती है !
🔸यदि नवमांश के लग्नेश शनि हो तो जातक की स्त्री अध्यात्मिक होने के साथ साथ न्याय प्रिय आचरण प्रिय तथा मेहनती होती है !
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🔸लग्न या लग्नेश में राहु का प्रभाव हो तो जातक की स्त्री चुगल खोर या प्रपंच करने वाली होती है !
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🔸यदि लग्नेश पर केतु का प्रभाव हो तो जातक की स्त्री अधिक बिलनी वाली व कुछ बातो को छिपाने वाली होती है !
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🔸यदि नवमांश कुंडली का लग्नेश यदि स्वराशी में स्थित हो , केंद्र या त्रिकोण में बैठा हो तो जातक को पत्नी का पूरा सुख प्राप्त होता है !
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🔸नवमांश पति यदि पाप यिक्त या पाप द्रष्ट हो या 6 8 12 वे भाव में हो और यह स्थित लग्न कुंडली में भी तो जैसे सप्तमेश पाप युत व पाप द्रष्ट हो तो जातक को स्त्री सुख नहीं मिलता है !
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🔸पाप ग्राही की संख्या नवमांश लग्न में जितनी अधिक होगी जातक की स्त्री उतना अधिक परेशां होगी !
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