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छः मुखी रूद्राक्ष

रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के रूद्र से हुई है इसलिए इसका नाम रुद्राक्ष पड़ा ! रुद्राक्ष को पूर्ण विधिवत व श्रद्धा अनुसार धारण करने से भगवान शिव की तो विशेष कृपा प्राप्त होती ही है साथ में रुद्राक्ष को उनके मुख के अनुसार धारण करने से अलग-अलग देवों द्वारा भी आशीर्वाद प्राप्त होता है ! एक से लेकर 14 मुखी तक के सभी रुद्राक्षों में अलग-अलग देवों का आशीर्वाद निहित होता है ! आज हम आपको 6 मुखी रुद्राक्ष के महत्व और इसे सिद्ध करने के उपरान्त धारण करने की विधि के विषय में जानकारी देंगे !

#6_मुखी_रुद्राक्ष_के_अधिदेव: 

6 मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय का स्वरुप माना गया है ! ज्योतिष के प्रभाव अनुसार इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र मजबूत बनता है ! शुक्र जनित दोषों को दूर करने में यह रुद्राक्ष बहुत प्रभावी सिद्ध होता है ! पुराणों के अनुसार 6 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ब्रह्म हत्या जैसे भयंकर पाप से भी मुक्ति मिल जाती है !

#6_मुखी_रुद्राक्ष_के_लाभ : 

1-  6 मुखी रुद्राक्ष को विधिवत धारण करने से भगवान शिव , भगवान कार्तिकेय और शुक्र गुरु से आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ-साथ और भी बहुत से  लाभ प्राप्त होते हैं जैसे –

2- तीव्र बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए 6 मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाना चाहिए !

3- स्वयं में नेतृत्व क्षमता का विकास करने के लिए भी आप 6 मुखी रुद्राक्ष को धारण कर सकते है !

4- 6 मुखी रुद्राक्ष शुक्र ग्रह से सम्बंधित होने कारण इसे धारण करने से धन-लक्ष्मी, भौतिक सुख-सुविधा, मकान, वाहन की प्राप्ति और वैवाहिक सुख की अनुभूति होती है !

5- छहः मुखी रुद्राक्ष पहनने से जीवन से हर प्रकार की दरिद्रता दूर हो जाती है !

6- विद्यार्थियों के लिए छहः मुखी रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ माना गया है ! इससे उनकी बुद्धि का विकास होता है एवं हर परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है !

7- तुला और वृषभ राशी के लिए छहः मुखी रुदाक्ष पहनना बहुत शुभ होता है !

8- शरीर से रोगों को दूर करने में भी छहः मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जा सकता है !

9- कुण्डली में शुक्र गृह के कमजोर होने पर भी छहः  मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाना चाहिए !

#रुद्राक्ष_को_सिद्ध_करने_की_विधि : –

सिद्ध किये गये रुद्राक्ष को गले में धारण करने से इसका प्रभाव 100 गुना अधिक बढ़ जाता है ! इसलिए आप कोई भी रुद्राक्ष धारण करने का मन बनाये तो पहले इसे सिद्ध अवश्य करें ! रुद्राक्ष को सिद्ध करने के लिए रुद्राक्ष की विधिवत पूजा के साथ-साथ "ॐ नमः शिवाय !" मंत्र के 5000 संख्या में जप करें और अंत में हवन करें ! हवन में अधिक अधिक से आहुतियाँ "ॐ नमः शिवाय" मंत्र से देना चाहिए । हवन के अंत में रुद्राक्ष को 21 बार हवन के ऊपर से घुमाये व हवन की विभूति से तिलक करने के उपरान्त शिवजी का आशिर्वाद लेकर इसे धारण करना चाहिए ।

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