बहुत लोग इस भ्रम में रहते हैं कि उनकी जन्म कुण्डली के अनुसार उनका इष्टदेव कौन हैं ? इस विषय में मैं जानकारी देना चाहता हूँ कि आप यह कैसे जाने ?
. वास्तव में आपके खानदान के कुल देवता या इष्टदेव आपके कुल देवता ही हैं ! अब आप कहेंगे कि हमें तो अपने कुल देवता के बारे में भी ठीक-ठीक जानकारी नहीं है .....!
. तब मैं बताना चाहूँगा कि आपको अपने कुल देवता की जानकारी है, पर आप उस जानकारी को हल्के में लेते हैं, जिससे वह मात्र औपचारिक बनकर रह जाते हैं ! वास्तव में किसी को अपने कुल देवी देवता के प्रति कोई रुचि ही नहीं होती है ! आपके घर परिवार में हमेशा कुल देवी देवता की पूजा होती है और घर के बुजुर्ग उनके बारे में भलीभाँति अवगत हैं ! आप कहेंगे हमें तो किसी ने कुलदेवता के बारे मे बताया ही नहीं ! तब मैं बताना चाहूँगा कि जैसे बिना किसी के बताये आप अपने माँ बाप की पहचान करने में कोई भूल नहीं कर सकते, वैसे ही यदि ध्यान देते तो कुल देवी देवता को भी पहचान जाते !
. आपके घर में जब कोई शादी ब्याह या मांगलिक कार्य, वधू का गृह प्रवेश होता है, तब आपके घर के मुख्य दरवाजे पर दोनो तरफ आपके कुल देवी देवता की स्थापना की जाती है ! दरवाजे के दोनो तरफ आयताकार घेरा बनकर उसमें सिंदूर या रोली से बड़ा सा स्वास्तिक चिह्न बनते हैं ! दाहिनी तरफ सबसे दाहिने गाय के गोबर से अंगूठे के आकार से थोड़ा मोटा व लम्बा दो प्रतीक चिपकाते हैं, जिसे वह गौरी व गणेश मानकर उसपर जौ व चावल के साबूत दाने लगाते हैं और हल्दी कुमकुम भी लगाकर पूजते हैं ! वायीं तरफ की आयताकार आकृति में उसी प्रकार गाय के गोबर से तीन प्रतीक लगाकर जौ व चावल के साबूत दाने गड़ा कर हल्दी कुमकुम से सुशोभित करते हैं, यह ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक होते हैं ! आपने एक गीत भी गाते सुना होगा —
"सदा भवानी दाहिने सम्मुख रहें गणेश !
पंच देव रक्षा करें ब्रह्मा विष्णु महेश !!"
. तब यही पाँचो देवता मांगलिक कार्य की सफलता हेतु स्थापित कर पूजे जाते हैं ! यही नहीं घर के एक विशिष्ट स्थान पर "कोहबर" बनाया जाता हैं, वहाँ भी कुल देवी देवता को स्थापित कर पुरोहित द्वारा विधिवत पूजा करायी जाती है !
. सनातन धर्मावलम्बियों के 'कोहबर' में "गौरी-गणेश" की स्थापना कर या विष्णु भगवान की स्थापन कर पूजा करायी जाती है, परम्परा के अनुसार अलग देवी देवता भी कुलदेवी देवता हो सकते हैं !
नवागत वधू को सबसे पहले 'कोहबर' ले जाया जाता है, जहाँ वह अपने परिवार के कुल देवी देवता का आशिर्वाद लेती है ! उसके बाद ही अन्य औपचारिकताएं पूरी करती हैं !
. "तब मैं बताना चाहूँगा कि जिन देवी देवता की स्थापना या पूजा घर के मुख्य दरवाजे पर या कोहबर में करके पूजा की जाती है, वही आपके कुल देवी या देवता हैं !"
अब रही बात किसी की जन्म कुण्डली के इष्टदेव की बात तो यह हर व्यक्ति की कुण्डली में अलग अलग होते हैं ! वास्तव में किसी की भी लग्न कुण्डली के पंचम भाव में स्थित राशि का देवता ही आपका इष्टदेव होता है ! जिसे आप इस प्रकार से विस्तार से समझ सकते हैं :—
लग्न पंचमेश राशि इष्टदेव
मेष सूर्य सिंह विष्णु, राम,
मीन चन्द्र कर्क शिव, पार्वती,कृष्ण,
धनु मंगल मेष हनुमान,कार्तिकेय,
कुम्भ बुद्ध मिथुन दुर्गा, गणेश,
सिंह गुरु धनु ब्रम्हा, विष्णु,
मकर शुक्र वृष लक्ष्मी, मां गौरी,
कन्या शनि मकर भैरव,हनुमान, यम,
वृष राहु कन्या सरस्वती,भैरव,शेषनाग,
वृश्चिक केतु मीन गणेश, मत्स्यावतार,
तुला शनि कुम्भ हनुमान,भैरव, शिव,
मिथुन शुक्र तुला लक्ष्मी, माँ गौरी,
कर्क मंगल वृश्चिक हनुमान, कार्तिकेय ।
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