प्रत्येक लग्न के लिए एक ग्रह ऐसा होता है जो योगकारक होने के कारण शुभ फलदायी होता है ! यदि ऐसा ग्रह कुण्डली में बलवान अर्थात् उच्चराशिस्थ, स्वराशिस्थ् या वर्गोत्तमी होकर केन्द्र या त्रिकोण भाव में शुभ ग्रह के प्रभाव में स्थित हो व इस पर किसी भी पाप ग्रह का प्रभाव न हो तब यह अकेला ही जातक को उन्नति देने में सक्षम होता है ! अतः इसका रत्न धारण करना विशेष शुभ फलदायी तथा चमत्कारी प्रभाव देने वाला होगा, परन्तु यदि यह अशुभ भाव में अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ग्रस्त हो तब जातक इस योगकारक ग्रह के चमत्कारी प्रभाव से वंचित रह जाता है ! ऐसी स्थिति में इसकी अशुभ भाव जनित अशुभता को नष्ट करने हेतु इसके लिये रुद्राक्ष धारण किया जाना चाहिए !
आज कल की भाग दौड़ व अतिव्यस्तता भरी जीवन-शैली में कई बार पूजा पाठ आदि के लिए समय दे पाना सम्भव नहीं हो पाता ! ऐसी स्थिति में रत्न धारक को सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति हेतु रुद्राक्ष भी धारण करना चाहिए, क्योंकि रत्न सकारात्मक ऊर्जा वाले व्यक्ति के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध होते हैं ! जहां शुभ, योगकारक व बली ग्रहों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए रत्न धारण करना चाहिए वहीं अकारक, नीच राशिस्थ व अशुभ भाव में स्थित ग्रह के शुभ फल प्राप्त्यार्थ रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ होता है !
** #लग्न_के_अनुसार_रत्न_व_रुद्राक्ष **
1- मेष लग्न —
आपको सूर्य का रत्न माणिक्य धारण करना चाहिए व तीनमुखी तथा पंचमुखी रुद्राक्ष भी पहनना चाहिए ! जिन जातकों की जन्मपत्री में सूर्य शुभ प्रभाव में बली होकर बैठा हो उन्हें यश, मान, कीर्तिलाभ व सत्ता की प्राप्ति होगी तथा जिनका सूर्य अशुभ भाव में बैठा है उन्हें नौकरी रोजगार व राजदण्ड आदि समस्याओं के निराकरण में सफलता प्राप्त होगी ! मेष लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र मंगल व गुरु योगकारक ग्रह हैं ! अतः यह जातक माणिक्य, मोती, मूंगा व पुखराज धारण कर सकते हैं लेकिन मंगल अष्टमेश् है अतः मंगल के लिए 3 मुखी रुद्राक्ष स्वास्थवर्धक रहेगा ! गुरु के लिए द्वादशेश होने के कारण पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करना समृद्धि कारक होगा ! बुद्ध, शुक्र व शनि इस लग्न के लिए बाधाकारक हैं, अतः इन ग्रहों के लिए रत्न धारण न कर 4 मुखी, 6 मुखी व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ है ! यदि सूर्य, चन्द्र भी छठे, आठवें एवं बारहवें स्थान पर आ जाते हैं तब रत्न की अपेक्षा 1 मुखी व 2 मुखी रूद्राक्ष धारण करना ही श्रेष्ठ है !
2- वृषभ लग्न —
वृषभ लग्न के लिए शनि, शुक्र व बुद्ध योगकारक हैं इसलिए नीलम, हीरा व पन्ना पहनना आपके लिए शुभ है ! अष्टमेश गुरु एवं द्वादशेश मंगल के अशुभ प्रभाव से मुक्ति हेतु 5 मुखी एवं 3 मुखी रूद्राक्ष धारण करें ! सूर्य व चन्द्रमा भी इस लग्न के लिए बाधाकारक है इसलिए इनके लिए भी 1 मुखी व 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! शनि, शुक्र व बुद्ध भी यदि छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर आ जाते हैं तब रत्न की अपेक्षा 7, 6 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करना ही श्रेष्ठ है !
3- मिथुन लग्न —
मिथुन लग्न के लिए बुद्ध, शुक्र व शनि योगकारक हैं इसलिए आप पन्ना, हीरा व नीलम धारण कर सकते हैं परन्तु शुक्र द्वादशेश् व शनि अष्टमेश् भी हैं इसलिए इनका पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु 4 मुखी रुद्राक्ष भी साथ में धारण करेंगे तब पूर्ण फल प्राप्त होगा ! सूर्य, चन्द्रमा व मंगल की शुभता के लिए एक, दो व तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! यदि गुरु केन्द्राधिपति दोष की स्थिति में हों तब गुरु का रत्न पुखराज अशुभफलदायी हो जाता है, अतः गुरु के शुभ फल हेतु रुद्राक्ष की पंचमुखी माला या पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करें !
4- कर्क लग्न —
कर्क लग्न के लिए चन्द्र, मंगल व गुरु योगकारक हैं इसलिए मोती, मूंगा व पुखराज धारण करना शुभ रहेगा परन्तु गुरु के षष्ठेश होने के अशुभ प्रभाव को कम करने हेतु साथ में पंचमुखी रुद्राक्ष भी धारण करना चाहिए ! शनि, बुद्ध, शुक्र इस लग्न के लिए अकारक हैं तथा सूर्य में मारक प्रभाव है अतः इनके लिए 7, 4, 6 व 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करना ही बेहतर होगा ! यदि चन्द्र, मंगल व गुरु भी अशुभ भाव में आ जाएं तो रत्न की अपेक्षा 2, 3 व पंचमुखी रुद्राक्ष पहनें !
5- सिंह लग्न —
सिंह लग्न के लिए सूर्य व मंगल योगकारक हैं ! अतः इनके लिए माणिक्य व मूंगा धारण करें ! अष्टमेश गुरु, द्वादशेष चन्द्रमा तथा अकारक शनि, बुद्ध व शुक्र के लिए 5, 2, 7, 4 व 6 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ रहेगा ! यदि सूर्य व मंगल अशुभ भाव में स्थित हों तब इनके लिए भी 1 मुखी व 3 मुखी रुद्राक्ष ही धारण करना चाहिए !
6- कन्या लग्न —
कन्या लग्न के लिए बुद्ध, शुक्र व शनि योगकारक हैं इसलिए पन्ना, हीरा व नीलम धारण करना शुभ रहेगा परन्तु अष्टमेश शनि व द्वितीयेश शुक्र के लिए साथ में 7 व 6 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करें ! यदि बुद्ध, शुक्र व शनि अशुभ भाव में बैठे हों तब रत्न की अपेक्षा रुद्राक्ष ही धारण करें ! कन्या लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र व मंगल अकारक हैं इसलिए इनकी शान्ति हेतु 1, 2 व 3 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! गुरु के केन्द्राधिपति दोष के निवारणार्थ पंचमुखी रुद्राक्ष या रुद्राक्ष माला धारण करना हितकर रहेगा !
7- तुला लग्न —
तुला लग्न के लिए शुक्र, शनि व बुद्ध योगकारक हैं इसलिए हीरा, नीलम व पन्ना धारण करें ! अष्टमेश शुक्र व षष्ठेश बुद्ध के लिए इनके साथ 6 व 4 मुखी रुद्राक्ष भी धारण करना चाहिए ! सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु इस लग्न के लिए अकारक हैं अतः इनके लिए रत्न की अपेक्षा 1, 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! यदि शुक्र, शनि व बुद्ध अशुभ भाव में बैठे हों तब रत्न की अपेक्षा 6, 7 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करना ही उचित होगा !
8- वृश्चिक लग्न —
वृश्चिक लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु योगकारक हैं इसलिए इनके रत्न माणिक, मोती, मूंगा व पुखराज धारण करें ! मंगल के षष्ठेश होने के अशुभ प्रभाव से मुक्ति हेतु 3 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! अकारक शनि, शुक्र व बुद्ध के लिए 7, 6 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! यदि सूर्य, चन्द्र एवं गुरु अशुभ भाव में स्थित हों तब इनके लिए 1, 2 व 5 मुखी रुद्राक्ष ही धारण करें !
9- धनु लग्न —
धनु लग्न के लिए गुरु, सूर्य व मंगल योगकारक हैं ! अतः पुखराज, माणिक्य व मूंगा धारण करें ! मंगल द्वादशेश भी है इसलिए 3 मुखी रुद्राक्ष पहनना भी आवश्यक है ! अष्टमेश् चन्द्रमा के लिए 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! अकारक शुक्र, बुद्ध व शनि के लिए 6, 4 व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभत्व देता है ! यदि सूर्य, मंगल व गुरु अशुभ भाव में बैठे हों तब इनके लिए 1, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें !
10- मकर लग्न —
मकर लग्न के लिए शनि, शुक्र व बुद्ध योगकारक हैं अतः नीलम, हीरा व पन्ना धारण करना चाहिए ! सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु इस लग्न के लिए अशुभ हैं अतः 1, 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! यदि बुद्ध, शुक्र व शनि अशुभ भाव में स्थित हों तब इनके लिए भी रत्न की अपेक्षा 4, 6 व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें !
11- कुम्भ लग्न —
कुम्भ लग्न के लिए शनि, शुक्र व बुद्ध योगकारक हैं अतः नीलम, हीरा व पन्ना धारण करें ! शनि द्वादषेश भी है और बुद्ध भी अष्टमेश होने के दोष से ग्रसित हैं, इसलिए रत्नों के साथ 7 व 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करें ! सूर्य, चन्द्र, मंगल व गुरु अकारक हैं अतः इनका शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए 1, 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए ! यदि बुद्ध, शुक्र व शनि अशुभ भाव में स्थित हों तब इनके लिए भी रत्न की अपेक्षा 4, 6 व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें !
12- मीन लग्न —
मीन लग्न के लिए शुक्र, बुद्ध व शनि अशुभ हैं अतः इनके लिए 4, 6, व 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए ! चन्द्र, मंगल व गुरु कारक हैं अतः इनके लिए मोती, मूंगा व पुखराज धारण करें ! अशुभ भाव में स्थित होने की स्थिति में रत्न की अपेक्षा 2, 3 व 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ रहेगा ! षष्ठेश सूर्य का शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करें !
** ध्यान रहे कि यह सभी उपाय लग्न के अनुसार बतायी गयीं हैं, इसे राशि के अनुसार समझकर धारण न करें !
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