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भविष्य वक्ता बनने के योग

भविष्यवक्ता बनने के योग

 🔶 यदि किसी जातक के द्वितीय ( वाणी, कुटुम्ब) भाव में पंचमेश या बुद्धदेव अथवा बृहस्पति अष्टमेश के साथ युति कर रहे हों तब मनुष्य गूढ़ विद्या एवं पूर्वजन्मकृत बातों को बताने की क्षमता रखने वाला भविष्यवक्ता हो सकता है ! 

🔶 पंचम स्थान में लग्नेश, द्वितीयेश, दशमेश एवं बुद्ध व बृहस्पति की युति हो जाय एवं ये सभी अष्टमेश से दृष्ट  हों तब वह व्यक्ति ज्योतिषी बनकर धनार्जन करता है !

🔶शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से लेकर कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि तक का चंद्र पूर्ण बलवान होकर सूर्य, बुद्ध व बृहस्पति से सम्बन्ध बनाए एवं इन पर दशमेश एवं एकादशेश की दृष्टि हो तब भी मनुष्य ज्योतिष विद्या के माध्यम से धनोपार्जन करता है !

🔶 यदि अष्टमेश पंचमेश के साथ लग्न में स्थित होकर द्वितीयेश एवं एकादशेश आदि ग्रहों से दृष्टि या किसी अन्य प्रकार से भी सम्बन्ध बना लें तब भी मनुष्य ज्योतिष के क्षेत्र में सफलता प्राप्त  कर सकता है !

🔶यदि अष्टमेश का चन्द्रमा या शनि से दृष्टि या युति सम्बन्ध बनता हो या अष्टमेश व पंचमेश की युति हो  जाय तब भी मनुष्य ज्योतिषी कार्य में रुचि रखता है !

 🔶 यदि बुद्धि व ज्ञान के कारक ग्रह बृहस्पति बलवान होकर चंद्र के साथ गजकेसरी योग, लग्न, पंचम अष्टम या नवम भावों में होकर रचना कर रहे हों तब मनुष्य ज्योतिषी व हस्तरेखा विशेषज्ञ हो सकता है !

🔶 यदि क्षीण चंद्रमा पर शनि की दृष्टि हो अथवा चंद्र-बुद्ध की युति हो और उस पर शनि की दृष्टि हो या शनि चंद्रमा बुद्ध की युति हो साथ ही बृहस्पति बुद्ध व शुक्र के साथ किसी भी प्रकार का सम्बन्ध बनाता हो तब मनुष्य ज्योतिष शास्त्र में रूचि रखता है !

 🔶 यदि जन्मपत्रिका में बुद्ध व बृहस्पति का परस्पर स्थान परिवर्तन हो जाय तब मनुष्य को ज्योतिषीय ज्ञान में रूचि लेने की प्रबल संभावना  बनती है ! इसके साथ ही पंचमेश व नवमेश इन दोना ग्रहों से दृष्टि या युति सम्बन्ध बनालें तब ऐसा मनुष्य सफल भविष्यवक्ता हो सकता है !
 
🔶 यदि जन्मपत्रिका में बुद्ध व बृहस्पति की युति या दृष्टि सम्बन्ध होकर अष्टम भाव से सम्बन्ध हो जाये तब एेसा मनुष्य गूढ़ विद्याओं का ज्योतिषीय ज्ञान रखने वाला हो सकता है !

🔶 यदि किसी कुण्डली के दशम भाव में लग्नेश, पंचमेश, अष्टमेश, नवमेश, बुद्ध व बृहस्पति इत्यादि जितने भी अधिक से अधिक ग्रह स्थित हो जांय मनुष्य उतना ही सफल ज्योतिषी बन सकता है !

🔶 यदि केतु का बुद्ध एवं बृहस्पति से सम्बन्ध हो जाय तब यह स्थिति भी मनुष्य को अपनी दशा-अंतर्दशा में ज्योतिष के क्षेत्र में ले जाने में सफल होता है, क्योंकि केतु भी गूढ़ विद्याओं में पारंगत करने में सहायक सिद्ध होता है !

ज्योतिर्विद पंडित डी.एन. पाण्डेय  #प्रयागराज !

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