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मुझे मालुम है.....

मुझे मालुम है
मैं अब किसी का हो नही सकता
तुम्हारा साथ गर मांगू तो
तुम मंजुर मत करना 

यहाँ का हूं वहाँ का हूं
खुदा जाने कहां का हूं
मुझे दुरी से क़ुरबत है
ये दुरी दुर मत करना

न घर अपना न दर अपना
जो कमियां है वो कमियां है
अधुरेपन का आदी हूँ
मुझे भरपूर मत करना

जो शोहरत के लिए गिरना पड़ें
खुद अपनी नजरो से
तो फिर खुदा हरगिज मुझे
मशहूर मत करना ।

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