अकाल मृत्यु सम्बंधित कुछ योग :
मृत्यु एक अटल सत्य है ! कोई इस संयोंग को बदल नहीं सकता ! कब, किस कारण, किसकी कहाँ पर मौत होगी, यह कोई भी नहीं बता सकता है ! कुछ लोगों की मृत्यु कम उम्र में ही हो जाती है, ऐसी मृत्यु को अकाल मृत्यु कहते हैं ! उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, जन्म कुण्डली में जब कुछ खाश अशुभ योग बनते हैं तब व्यक्ति की अकाल मृत्यु होने के कारण बनते हैं ! यह अशुभ योग किन ग्रहों के कारण बनते हैं, इसकी जानकारी आगे दी जा रही है —
1. जिसकी कुण्डली के लग्न भाव में मंगल स्थित हो और उस पर सूर्य या शनि की अथवा दोनों की दृष्टि पड़ रही हो तब दुर्घटना में मृत्यु होने की पूर्ण सम्भावना रहती है ।
2. यदि कुण्डली में राहु-मंगल की युति हो अथवा दोनों समसप्तक होकर एक-दूसरे को देख रहे हों तब भी दुर्घटना में मृत्यु होने का कारण हो सकता है ।
3. यदि छठवे भाव का स्वामी पापी ग्रह से युक्त होकर छठवे या आठवे भाव में स्थित हो तब उसकी दुर्घटना में मृत्यु होने का भय रहता है ।
4. ज्योतिष शास्त्र के अऩुसार, यदि लग्न भाव, द्वितीय भाव व बारहवें भाव में अशुभ ग्रह स्थिति हों तब उस व्यक्ति की हत्या होने से मृत्यु हो सकती है ।
5. यदि दसवें भाव की नवांश राशि का स्वामी राहु अथवा केतु के साथ स्थित हो तब व्यक्ति की अस्वभाविक मृत्यु होती है ।
6. यदि लग्नेश तथा मंगल की युति छठवे, आठवें या बारहवें भाव में हो तब व्यक्ति की मृत्यु शस्त्र के वार से हो सकती है ।
7. यदि कुण्डली में मंगल दूसरे, सातवें या आठवें भाव में स्थित हों और उस पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि पड़ रही हो तब व्यक्ति की मृत्यु आग से जलने से हो सकती है ।
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