राहु का विभिन्न भावानुसार फल :-----
लग्न --- सनक, नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव, किसी चीज़ का लत या व्यसन।
द्वितीय --- कुटुंब परिवार अथवा पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद, कुटुंब के द्वारा धोखा अथवा आर्थिक नुकसान, गर्दन में कोई तकलीफ़, स्थायी संपत्ति बनाने में अड़चन।
तृतीय --- भाई बहनों से विवाद या फिर उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी, खेलकूद पराक्रम में वृद्धि, आयात निर्यात के काम में सफलता, कंधे या फिर हाथों में कोई तकलीफ़।
चतुर्थ --- पारिवारिक वातावरण कलहपुर्ण, माता से संबंधित कोई चिंता या तकलीफ़, मकान की चिंता , हार्ट संबंधी तकलीफ़।
पंचम --- प्रेमी/प्रेमिका अथवा संतान से धोखा अथवा परेशानी, संतान प्राप्ति अथवा शिक्षा प्राप्ति में बाधा, अपयश।
षष्ठम --- रोग ऋण और शत्रुओं पर विजय, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, पेट में कोई तकलीफ़, ननिहाल पक्ष से निराशा या विवाद।
सप्तम --- वैवाहिक जीवन में विवाद, साझेदारी के काम में धोखाधड़ी, गुप्त रोग।
अष्टम --- जीवन में शुभ और अशुभ अकस्मात घटनाएं, मुत्र संबंधित कोई रोग, अकस्मात धन लाभ, ससुराल पक्ष से निराशा या विवाद।
नवम --- विदेश से लाभ, विदेशी व्यापार अथवा औनलाइन बिजनेस से फायदा, लाटरी सट्टा शेयर आदि से लाभ, विदेश यात्रा।
दशम --- कार्य व्यवसाय में बदलाव, कैरियर में अस्थिरता, पिता से मतभेद, जांघ में कोई तकलीफ़ हो सकती है।
एकादश --- आय में वृद्धि, मित्रों से लाभ या फिर आपसे मित्रों को लाभ, पैरों में तकलीफ़।
द्वादश --- अनावश्यक भागदौड़, जन्म स्थान से दूर तरक्की, दवा अथवा कोर्ट कचहरी में धन खर्च, आंखों या पैरों में तकलीफ़, आयात निर्यात के काम से लाभ।
इनमें से कोई एक समस्या अवश्य होती है
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