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निःसंतान योग और उसका निवारण

निःसंतान योग और उसका निवारण :

ज्योतिषीय गणनाओं एवं विभिन्न जातको की जन्म कुण्डली का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि अधिकांशतः संतान हीनता निम्न संयोगों के कारण होती है 

▪1 - यदि कुण्डली के पञ्चम् भाव का स्वामी 6, 8, या 12वें भाव में स्थित हो गया हो ।

▪2 - यदि कुण्डली के पञ्चम् भाव का स्वामी किसी भी भाव में अस्त हो गया हो अर्थात सूर्य के साथ बैठा हो ।

▪3 - यदि कुण्डली के पञ्चम् भाव में पापी ग्रह सूर्य, मंगल, राहु, शनि, इनमें से एक, दो, तीन अथवा चारों एक साथ स्थित हो जाँय ।

▪4 - यदि कुण्डली के पांचवें,दसवें या दूसरे भाव में मंगल की मौजूदगी हो ।

▪5 - यदि कुण्डली के आठवें अथवा तीसरे भाव में शनि स्थित हों ।

▪6 - यदि तीसरे भाव का स्वामी लग्न, धन, पञ्चम् इन भावो में उपस्थित हों ।

▪7 - यदि पञ्चम् भाव में चन्द्रमा, बुध के साथ मौजूद हों, तब भी संतानहीनता हो सकती है ! इसका कारण यह है कि मनुष्य पूर्व जन्म में ब्राह्मण से द्रोह किया था ।

▪8 - यदि पञ्चम् भाव का स्वामी स्त्री ग्रह हो, केंद्र में (1,4,7,10) इन भावो में चन्द्र, बुध, शुक्र, राहु की उपस्थिति हो तब संतानहीनता होती है, एेसा समझना चाहिए ! कदाचित संतान हो भी जाय तब उसका जीवित रहना मुश्किल होता है ।

इन योगों में पैदा हुआ मनुष्य धन धान्य से तो परिपूर्ण होता है परन्तु संतानहीन होता है ।
              
               #बचाव_के_उपाय :

1. भृगु मुनि के अनुसार —

"(ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्र: ॐ क्षौं क्षां क्षीं क्षं क्ष: ॐ)" 

इस मंत्र का एक लाख जाप भक्ति एवं श्रद्धा भाव से करें ! यह उपाय करने पर संतान की प्राप्ति होगी ।

2. संतान गोपाल मंत्र जियका वर्णन आगे किया गया है, का 1008 जाप करें संतान की प्राप्ति होगी । 

#संपूर्ण_मंत्र :

#विनियोग -

अस्य गोपाल मंत्रस्य, नारद ऋषि:, अनुष्टुप छंद:, कृष्णो देवता, मम पुत्र कामनार्थ जपे विनियोग: ।

#ध्यान :

विजयेन युतो रथस्थित: प्रसभानीय समुद्र मध्यत: !
प्रददत्त नयान् द्विजन्मने स्मरणीयो वसुदेव नंदन: !!

#संतान_गोपाल_मंत्र :

ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते !
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: !!

यह मंत्र एक लाख बार जपने पर सिद्ध हो जाता है ! मंत्र को जीवापोता, स्फटिक या रूद्राक्ष की माला से जपना चाहिए ! एक लाख मंत्र पूर्ण हो जाने के बाद इसका दशांश अर्थात् 10 हजार मंत्रों से हवन करना चाहिए ! हवन के पश्चात ब्राह्मणों को श्रद्धानुसार, क्षमतानुसार भोजन कराकर दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें ।

3.  #वंश_कवच का नियमित पाठ करने से भी संतान प्राप्ति के द्वार खोलता है ।

4.  #रुद्राभिषेक कराने एवं देवी पाठ कराकर  विधिवत हवन श्रद्धा पूर्वक कराने पर संतान की प्राप्ति होती है, इसमें कोई संशय नहीं है ।

5. सोलह गुरुवार को बृहस्पति देव का व्रत सपत्नीक रखें और नियमित केले के पौधे के नीचे घी का दीपक जलायें, शुद्ध अंतःकरण से ऐसा करने पर संतान की प्राप्ति होगी ।

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