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दशा के स्नानादि अवस्था

[दशा के स्नानादि अवस्था]
ये सिद्धांत ज्योतिष में मिलना बहुत ही दुर्लभ है जो 100%काम करता ही है।
आप के जीवन में चल रहे महादशा आप को किस मुकाम तक पहुंचाएगा ये आप का महादशा के स्नानादि अवस्था बताता है। जिसका मैनें उदाहरण से साथ प्रस्तुत कर रहा हु।। 

✓मैंने खुद भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल की के राहु की दशा का जब अवस्था निकाला तो मुकुटप्राप्ति आया जो उनको प्रधान मंत्री का ताज पहनाया।
✓जब श्री नरेंद्र मोदी जी के कुंडली पर लगाए तो मिस्ठान भोजन (कार्य सिद्धि मिठाई बताना)जैसे की उनकी चंद्र की दशा चल रहा था मिठाई बटी पूरे भारत में और फिर मंगल का भी अवस्था यही है जो 2028 तक रहेगा।।

अवस्था निकलने की सरल विधि
दशा फल के लिए सारे ग्रहों की अवस्था जान लेनी चाहिए। इसके लिए 

1)जन्म लग्न की राशि संख्या
2) ग्रह जिस राशि में हो उसकी संख्या को आपस में जोड़कर दुगुना कर लें। इस संख्या को विचाराधीन ग्रह की विंशोत्तरी दशा के सालों से( जिसकी दशा जितने साल की होती है जैसे मंगल का 7 साल, चंद्र का 10 साल)  गुणा करें।

3) इस गुणनफल का27 से भाग दें। 

शेष संख्या स्नानादि 27 अवस्थाओं में से उस ग्रह की वर्तमान अवस्था को प्रकट करेगी।

ये स्नानादि अवथाएं ग्रह की दशा का मूल स्वर, दिशा और महादशा के फल के बीज को सूत्र रूप में जानने में बड़े काम आती है। ये हर एक जन्मपत्र में अलग होती है

इनके नाम यहां क्रमशः बताए जा रहे हैं।

सत्ताईस अवस्थाओं के नाम के अर्थ के अनुसार होने वाले फल के अतिरिक्त विस्तृत फल क्रमशः दिया जा रहा है-

1. स्नान- आदर मान सम्मान, सुख शान्ति, तसल्ली, मन में उत्साह, सफलता ।

 2. वस्त्रधारण- आभूषण, अवार्ड, दुनियादारी के नजरिए से सफलता, भोग विलास, खुशहाली।

3. मोद- विदेश या दूर स्थान से लाभ, अच्छा नाम
प्रतिष्ठा, यश।

 4. पूजारम्भ - सम्पत्ति, वाहन सुख, मान सम्मान, जीवन स्तर में वृद्धि, सब तरह से लाभ।

5. प्रार्थना- सरकारी विभागों से कष्ट, मान प्रतिष्ठा में कमी, बदनामी, अपनी जगह से हटना, भागना, छुपना आदि ।

6. पूजा- मान सम्मान, अधिकार प्राप्ति, अगली कतारों में आना, जाति बिरादरी में मुखिया या पंच बनना, सांसारिक सुख, सम्पत्ति, खुशहाली।

7. यज्ञारम्भ- पित्त से परेशानी, शरीर कष्ट, रोग पीड़ा, अध्ययन स्वाध्याय में बाधा रुकावट।

8. प्रभुध्यान- शत्रुओं पर काबू पाना, अचल सम्पत्ति में बढ़ोतरी

9. उपवेश- उदारता, सबसे मीठा व्यवहार, मधुर भाषा, प्रतिष्ठा वाले वाहन का सुख ।

10. प्रदक्षिणा - पेट में विकार, पाचन तन्त्र की कमजोरी, आरोप प्रत्यारोप, बदनामी।

11. भावना- सफलता, बहुत से सुख, मन में तसल्ली । 

12. अतिथिसत्कार- जीवन स्तर में वृद्धि, बड़प्पन, धन, आदर और नेकनामी,किसी वाद मुकदमा या रुपये पैसे के कारण प्रत्यक्ष में रहना । 

13. भोजन- रोग, अधिक लोभ लालच, अपमान, नीचा देखना, सामाजिक बहिष्कार, उपेक्षा।

14. जलसेवा- भोजन में बाधा, खाने के समय तनाव, रूखा सूखा या जिल्लत का खाना, मन और कर्म में दुराचार |

15. क्रोध- अकारण अपयश, सन्ताप, क्षोभ ।

 16. ताम्बूलाशन- धन में वृद्धि, सर्वत्र विजय, हाथ में लिए काम सफल होना, ज्ञान, बुद्धि, विचारों की शुद्धि और सही दिशा में प्रवर्तन ।

17. वसति घर जगह भवन निर्माण, धन का लाभ, स्थायी लाभ, अच्छा मान सम्मान प्रतिष्ठा, काम की जगह पर तारीफ, मन में तसल्ली, चिन्ताओं से मुक्ति, सम्पत्ति में वृद्धि, सुगम सफलता।

18. मुकुटप्राप्ति- देवराज इन्द्र के समान स्तर पदवी, मान और धन में बढ़ोत्तरी, राजयोग, अटूट जनसमर्थन, उच्च सम्मान, मुख्य पद या समाज में सबसे ऊंचा स्थान, धर्म और ईमानदारी की कमाई, सब तरह के सुख ।

19. मन्त्र- आलस, असावधानी, झूठा आरोप या विवाद, बातचीत में कुशलता। और चतुराई ।

20. विलम्ब - आलस्य की अधिकता, काम में असावधानी, अधिक आत्मविश्वास से गलती हो जाना, अनाड़ीपन, गहरी जानकारी पाने से बचना।

21. निद्रा- क्रोध, रोग, परिजन परिवारजनों से मनमुटाव, अधिक उपद्रव । 22. मद्यपान- नशे के कारण परेशानी, सम्मानित लोगों की नाराज़गी, लोगों द्वारा धिक्कारना, छिपा क्षोभ और गुस्सा ।

23. मिष्टान्नभोजन- कार्य सिद्धि,मिठाई बटना,खुशी का माहोल मन में तसल्ली, नए मित्रों सहयोगियों की सहायता, सुख।

 24. धनागम व्यापार व्यवसाय में धन लाभ, बढ़ती धन सम्पत्ति।

25. किरीटत्याग- अपने लोगों द्वारा उपेक्षा, धन, पदवी, मान सम्मान में कमी, रोग, किसी पद को छोड़ने के हालात ।

26. शयन- दीर्घकालीन रोग, सत्ता अधिकार मिलने के योग, अच्छे लाभ और व्यक्तिगत हित ।

27. रति- अक्ल पर पद्म पड़ना, मन में सन्ताप, पछतावा, लोगों से दुश्मनी, दुष्ट विचारों की अधिकता, सब पर बेयकीनी, दुष्ट स्त्री के चंगुल में फंसना ।

उदाहरण /उदाहरण में चंद्र की महादशा में श्री नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधान मंत्री का पद मिला उस समय 
शेष आया था (23)मिस्ठान भोजन

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