* #व्यभिचार_योग_या_अवैध_सम्बंध_योग : . 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ . अवैध सम्बंध या विवाहेतर सम्बंध वह मीठा जहर है जो शरीर में घुल कर आत्मा तक को अपवित्र कर देता है ! अवैध सम्बंध का तात्पर्य सिर्फ शरीर से ही नहीं अपितु मन, वचन, कर्म के द्वारा सम्पूर्ण भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल को दूषित करने के साथ-साथ बच्चों एवं परिवार की नजरों में मनुष्यों को तुच्छ बनाकर घृणित कर्म मार्ग पर ला कर खड़ा करता हैं ! अवैध सम्बंधों के लिए कोई एक पक्ष दोषी नहीं होता, स्त्री और पुरुष दोनों से मिलकर ही अवैध सम्बंध सम्भव होता है ! . ज्योतिष शास्त्र में अवैध सम्बंध जैसे विषय पर भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है ! चन्द्रमा मन का कारक होता है और कामवासना मन से जागती है ! लग्न व्यक्ति स्वयं होता है पंचम भाव प्रेमिका और सप्तम भाव पत्नी का होता है एवं शुक्र भोग विलास का कारक ग्रह है, शनि, राहू, मंगल और पंचम भाव, पंचमेश, द्वादश और द्वादशेश का आपस में सम्बंध होना जातक के विवाह पूर्व एवं पश्चात अवैध सम्बंध स्थापित करवाते हैं ! . जन्म कुण्डली में सप्तम भाव पर शनि की चन्द्रमा के साथ युति जहां जातक को मानसिक...