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Showing posts from January, 2024

अवैध सम्बन्ध योग

* #व्यभिचार_योग_या_अवैध_सम्बंध_योग : . 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️  . अवैध सम्बंध या विवाहेतर सम्बंध वह मीठा जहर है जो शरीर में घुल कर आत्मा तक को अपवित्र कर देता है ! अवैध सम्बंध का तात्पर्य सिर्फ शरीर से ही नहीं अपितु मन, वचन, कर्म के द्वारा सम्पूर्ण भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल को दूषित करने के साथ-साथ बच्चों एवं परिवार की नजरों में मनुष्यों को तुच्छ बनाकर घृणित कर्म मार्ग पर ला कर खड़ा करता हैं ! अवैध सम्बंधों के लिए कोई एक पक्ष दोषी नहीं होता, स्त्री और पुरुष दोनों से मिलकर ही अवैध सम्बंध सम्भव होता है ! . ज्योतिष शास्त्र में अवैध सम्बंध जैसे विषय पर भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है ! चन्द्रमा मन का कारक होता है और कामवासना मन से जागती है ! लग्न व्यक्ति स्वयं होता है पंचम भाव प्रेमिका और सप्तम भाव पत्नी का होता है एवं शुक्र भोग विलास का कारक ग्रह है, शनि, राहू, मंगल और पंचम भाव, पंचमेश, द्वादश और द्वादशेश का आपस में सम्बंध होना जातक के विवाह पूर्व एवं पश्चात अवैध सम्बंध स्थापित करवाते हैं !  . जन्म कुण्डली में सप्तम भाव पर शनि की चन्द्रमा के साथ युति जहां जातक को मानसिक...

नक्षत्र मंत्र

.                         #मंत्रों_की_शक्ति : जैसा कि आप जानते हैं कि मंत्रो में अद्भुत और अदृष्य शक्ति निहित होता है ! प्रतिदिन, वार, तिथि व नक्षत्र बदलते रहते हैं ! किसी भी दिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय जिस नक्षत्र में चन्द्रमा का गोचर चल रहा हो वह उस दिन का प्रचलित नक्षत्र होता है ! .           यदि आप प्रातःकाल उठकर शौचादि से निवृत्त होकर उस दिन के नक्षत्र के मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करलें तब आपका वह दिन निर्विघ्न व्यतीत होगा, ऐसा शास्त्रों में उल्लिखित है ! आगे हम सभी 27 नक्षत्रों का बीज मंत्र प्रस्तुत कर रहे हैं, आप इसे अपने पास नोट कर रख लें और प्रतिदिन सुबह सर्व प्रथम उस दिन के नक्षत्र का मंत्र पाठ करने के पश्चात अपनी दिनचर्या प्रारम्भ करें, आपको निश्चित रूप से उसके शुभफल प्राप्त होंगे ! आप इसे स्वयं आजमा सकते हैं ! वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों के वेद मंत्र निम्नलिखित हैं :— 1. #अश्विनी नक्षत्र का वेद मत्र :— "ॐ अश्विनौ तेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वती !  व...

पंचम भाव

पंचम भाव -  पंचम भाव उत्सव , मनोरंजन , प्रथम संतान , स्पोर्ट्स , प्रेम , पुण्य , अथाह धन या बिना परिश्रम का धन , खुशी , रेस , स्टॉक एक्सचेंज , तकनीकी कला , परम ज्ञान , व्यक्ति के पूजित देवी देवता , सभी प्रकार के भौतिक सुख,  नृत्य , पत्नी या साझेदार का लाभ , बुद्धि , रचनात्मकता आदि को सूचित करता है । पंचम भाव जैसा कि प्रेम और अनुराग का भाव है यही बताता है कि व्यक्ति के शरीर का कोनसा भाग विपरीत लिंग को आकर्षित करेगा । 5 वें भाव का उपस्वामी ग्रह  यह डिसाइड करेगा । पंचम भाव का उपस्वामी ग्रह 27 नक्षत्रो में से जिस नक्षत्र में उपस्थित होगा उसी नक्षत्र द्वारा सूचित अंग , विशेषता को बतायेगा । यदि 5 वें भाव का उपस्वामी उपस्थित है -  1. अश्विनी नक्षत्र में - व्यक्ति के बालों का स्टाइल । 2. भरनी नक्षत्र में - आँखे , नाक । 3. कृतिका  नक्षत्र  में - जातक की लीडरशिप  , आवाज । 4. रोहिणी नक्षत्र में - व्यक्ति की आवाज ।  5. मृगशिरा नक्षत्र में - गर्दन और विचारों की अभिव्यक्ति । 6. आर्द्रा नक्षत्र में - कंधे । 7 . पुनर्वसु नक्षत्र में - व्यक्ति के हाथ , बोलने की स्...

श्री रामचरित मानस के सिद्ध मंत्र

श्री रामचरित मानस के सिद्ध मन्त्र मानस के दोहे चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये। फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र जप की आवश्यकता हो उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये। अष्टांग हवन सामग्री 1 चन्दन का बुरादा 2 तिल 3 शुद्ध घी4 चीनी 5 अगर 6 तगर, 7 कपूर 8 शुद्ध केसर 9 नागरमोथा 10 पञ्चमेवा,11 जौ और 12 चावल। जानने की बातें जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) 108 बार हवन करना चाहिये। यह हवन केवल एक दिन करना है। मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति दे देनी चाहिये। प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अन्त में ‘स्वाहा’ बोल देना चाहिये। प्रत्येक आहुति लगभग पौन तोले की (सब चीजें मिलाकर) होनी चाहिये। इस हिसाब से 108 आहुति के ...

हनुमान जी का चित्र

हनुमान जी का चित्र घर में कहाँ लगायें  〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। कठिन इसलिए की इसमें व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भुगतने होते हैं। हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता। आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे। जैसे- पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चिरते हुए, रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी, राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए हनुमानजी, रामायण पढ़ते हनुमानजी, सूर्य को निगलते ह...