Skip to main content

पंचम भाव

पंचम भाव - 
पंचम भाव उत्सव , मनोरंजन , प्रथम संतान , स्पोर्ट्स , प्रेम , पुण्य , अथाह धन या बिना परिश्रम का धन , खुशी , रेस , स्टॉक एक्सचेंज , तकनीकी कला , परम ज्ञान , व्यक्ति के पूजित देवी देवता , सभी प्रकार के भौतिक सुख,  नृत्य , पत्नी या साझेदार का लाभ , बुद्धि , रचनात्मकता आदि को सूचित करता है ।
पंचम भाव जैसा कि प्रेम और अनुराग का भाव है यही बताता है कि व्यक्ति के शरीर का कोनसा भाग विपरीत लिंग को आकर्षित करेगा । 5 वें भाव का उपस्वामी ग्रह  यह डिसाइड करेगा ।
पंचम भाव का उपस्वामी ग्रह 27 नक्षत्रो में से जिस नक्षत्र में उपस्थित होगा उसी नक्षत्र द्वारा सूचित अंग , विशेषता को बतायेगा ।
यदि 5 वें भाव का उपस्वामी उपस्थित है - 
1. अश्विनी नक्षत्र में - व्यक्ति के बालों का स्टाइल ।
2. भरनी नक्षत्र में - आँखे , नाक ।
3. कृतिका  नक्षत्र  में - जातक की लीडरशिप  , आवाज ।
4. रोहिणी नक्षत्र में - व्यक्ति की आवाज । 
5. मृगशिरा नक्षत्र में - गर्दन और विचारों की अभिव्यक्ति ।
6. आर्द्रा नक्षत्र में - कंधे ।
7 . पुनर्वसु नक्षत्र में - व्यक्ति के हाथ , बोलने की स्टाइल ।
8 . पुष्य नक्षत्र में - सीना , साहस ।
9 . आश्लेषा नक्षत्र में - व्यक्ति की शिक्षा , पीठ ।
10 . मघा नक्षत्र में - सीना , साहसपूर्ण कार्य ।
11 . पूर्वा - फागुनी नक्षत्र में - मनोरंजन के कार्य ।
12 . उत्तरा - फागुनी नक्षत्र में - व्यक्ति की भावुकता , रहन सहन का स्तर ।
13 . हस्त नक्षत्र में - पेट , खाने के आदतें ।
14 . चित्रा नक्षत्र में - व्यक्ति के कूल्हे , व्यक्ति का भोजन ।
15 . स्वाति नक्षत्र में - पेट का निचला भाग ।
16 . विशाखा नक्षत्र में - जातक का स्टेटस , हिप्स के नीचे का भाग ।
17 . अनुराधा नक्षत्र में - असभ्य प्रकृति , दादागिरी , सेक्स ।
18 . जेष्ठा नक्षत्र में - व्यक्ति की भावनाएं , सामाजिकता ।
19 . मूल नक्षत्र में - आस्तिकता , चाल ।
20 . पूर्वा षदा नक्षत्र में - दुसरो को आतंकित करने की कला , हिप्स ।
21 . उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में - भक्ति ।
22 . श्रवण नक्षत्र में - व्यक्ति का बिजनेस ।
23 . धनिष्ठा नक्षत्र में - लविंग & कैरिंग नेचर , जांघे । 
24 . शतभिषा नक्षत्र में - घुटने , व्यक्ति की तेजी से कार्य करने की क्षमता ।
25 . पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में -  सीना ( स्त्री जातक होने पर ) , सीने पर बाल ( पुरुष जातक होने पर ) , व्यक्ति के गोल घुटने ।
26 . उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में - व्यक्ति की टांगे , विदेशों में घूमने फिरने की आदत ।
27 . रेवती नक्षत्र में -  चलने का स्टाइल , पैरो की उंगलियां ।

Comments

Popular posts from this blog

षोडष वर्ग कुण्डली एवम उसका फलित

षोडष वर्ग कुण्डली तथा उसका फलित : .      षोडश वर्ग का फलित ज्योतिष में विशेष महत्व है ! जन्मपत्री का सूक्ष्म अध्ययन करने में यह विशेष बहुत सहायक होते हैं ! इन वर्गों के अध्ययन के बिना जन्म कुण्डली का विश्लेषण अधूरा होता है ! क्योंकि जन्म कुण्डली से केवल जातक के शरीर, उसकी संरचना एवं स्वास्थ्य के बारे में ही विस्तृत जानकारी मिलती है, परन्तु षोडश वर्ग का प्रत्येक वर्ग जातक के जीवन के एक विशिष्ट कारकत्व या घटना के अध्ययन में सहायक होता है ! #षोडशवर्ग_किसे_कहते_है : .     हम जानते हैं कि अगर राशिचक्र को बराबर 12 भागों में बांटा जाय तब हर एक हिस्‍सा राशि कहलाता है ! सूक्ष्‍म फलकथन के लिए राशि के भी विभाग किए जाते हैं और उन्‍हें वर्ग कहते हैं ! वर्गों को अंग्रेजी में डिवीजन (division) और वर्गों पर आधारित कुण्‍डली (वर्ग चर्क्र) को डिवीजनल चार्ट (divisional chart) कह दिया जाता है ! वर्गों को ज्‍योतिष में नाम दिए गए हैं ! जैसे — .     यदि राशि को दो हिस्‍सों में बांटा जाय तब ऐसे विभाग को होरा कहते हैं ! इसी तरह यदि राशि के तीन हिस्‍से किये जायें तब उस...

शेयर बाजार में सफलता

शेयर मार्केट में सफलता के योग कुंडली में देखना एक महत्वपूर्ण विषय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव वित्तीय सफलता, विशेषकर शेयर मार्केट में, को निर्धारित करता है। नीचे कुछ मुख्य योग और ग्रह स्थिति दी गई हैं जो शेयर मार्केट में सफलता का संकेत देती हैं: 1. बुध ग्रह की स्थिति बुध ग्रह बुद्धि, तर्क, और व्यापार का कारक ग्रह है। यदि बुध मजबूत हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो व्यक्ति को व्यापार और शेयर मार्केट में सफलता मिलती है। बुध का दूसरे, पांचवें, नवें या ग्यारहवें भाव में होना शुभ माना जाता है। बुध पर शुभ ग्रहों (जैसे बृहस्पति या शुक्र) की दृष्टि हो तो और भी लाभकारी होता है। 2. ग्यारहवें भाव की स्थिति ग्यारहवां भाव लाभ और आय का भाव है। यदि ग्यारहवें भाव का स्वामी शुभ ग्रहों के साथ हो और अशुभ ग्रहों से मुक्त हो, तो शेयर मार्केट में सफलता के योग बनते हैं। ग्यारहवें भाव में बृहस्पति, शुक्र या बुध की स्थिति लाभकारी होती है। 3. पंचम भाव और निवेश योग पंचम भाव निवेश, सट्टा, और भविष्य के लाभ को दर्शाता है। पंचम भाव का स्वामी अगर लाभ स्थान ...

नक्षत्र और शरीर के अंग

.         #27_नक्षत्र_और_शरीर_के_अंग :  (Relation Between Nakshatra and Body Parts) : .   वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को भी शरीर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है ! सभी 27 नक्षत्र शरीर के किसी ना किसी अंग का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन अंगों से  सम्बंधित परेशानी भी व्यक्ति को हो जाती हैं ! जो नक्षत्र जन्म कुण्डली में पीड़ित होता है उससे सम्बंधित बीमारी व्यक्ति को होने की  सम्भावना बनती है अथवा जब कोई नक्षत्र गोचर में पीड़ित अवस्था में होता है,  तब उससे सम्बंधित अंग में परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है !  .       इस लेख के माध्यम से आज हम उन सभी नक्षत्रों व उनसे सम्बंधित शरीर के अंगों के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ इससे आपके मन में उठने वाले ऐसे प्रश्नो का समाधान हो जायगा ! मेरे कुछ शिष्य अक्सर यह जानना चाहते हैं कि कौन सा नक्षत्र शरीर के किस अंग का प्रतिनिधित्व करता है ! इससे उनका भी समाधान हो जायेगा ! #अश्विनी_नक्षत्र : अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु हैं ! यह पहला नक्षत्र है और इसलिए यह सिर के ...