* #व्यभिचार_योग_या_अवैध_सम्बंध_योग :
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. अवैध सम्बंध या विवाहेतर सम्बंध वह मीठा जहर है जो शरीर में घुल कर आत्मा तक को अपवित्र कर देता है ! अवैध सम्बंध का तात्पर्य सिर्फ शरीर से ही नहीं अपितु मन, वचन, कर्म के द्वारा सम्पूर्ण भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल को दूषित करने के साथ-साथ बच्चों एवं परिवार की नजरों में मनुष्यों को तुच्छ बनाकर घृणित कर्म मार्ग पर ला कर खड़ा करता हैं ! अवैध सम्बंधों के लिए कोई एक पक्ष दोषी नहीं होता, स्त्री और पुरुष दोनों से मिलकर ही अवैध सम्बंध सम्भव होता है !
. ज्योतिष शास्त्र में अवैध सम्बंध जैसे विषय पर भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है ! चन्द्रमा मन का कारक होता है और कामवासना मन से जागती है ! लग्न व्यक्ति स्वयं होता है पंचम भाव प्रेमिका और सप्तम भाव पत्नी का होता है एवं शुक्र भोग विलास का कारक ग्रह है, शनि, राहू, मंगल और पंचम भाव, पंचमेश, द्वादश और द्वादशेश का आपस में सम्बंध होना जातक के विवाह पूर्व एवं पश्चात अवैध सम्बंध स्थापित करवाते हैं !
. जन्म कुण्डली में सप्तम भाव पर शनि की चन्द्रमा के साथ युति जहां जातक को मानसिक रूप से पीड़ित करती है, वहीं प्रेम सम्बंध भी करवाती है ! कुछ ऐसे ज्योतिषीय योगों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिनके जन्म कुण्डली में होने से, जातक का अवैध सम्बंध और कामुक होने का संकेत मिलता है :
1. 👉 जन्म कुण्डली में शनि और शुक्र की युति, वैवाहिक जीवन में किसी तीसरे का आना दर्शाता है !
2. 👉 पंचम भाव में शनि, शुक्र और मंगल की युति अवैध सम्बंध का निर्माण करता है !
3. 👉 मेष या वृश्चिक राशि में मंगल के साथ शुक्र के होने से पराई स्त्री से घनिष्ठता बनती है ! ऐसे जातक अपने ही सगे-सम्बंधियों जैसे मौसी, बुआ आदि से सम्बंध बनाने से भी नहीं हिचकते हैं !
4. 👉 जन्म कुण्डली में चन्द्रमा से द्वितीय स्थान में शुक्र स्थित हो तब 'सुनफा योग' बनता है, ऐसा जातक भौतिक सुखों की प्राप्ति करता हैं उसका सौन्दर्य आकर्षक होता है, अतः अन्य स्त्रियों से शारीरिक सम्बंध की प्रबल सम्भवना रहती है !
5. 👉 द्वितीय, छठवें और सप्तम भाव के किसी भी स्वामी के साथ शुक्र की युति लग्न में होने से जातक का चरित्र संदेहास्पद होता है !
6. 👉 सूर्य और शुक्र की युति मीन लग्न में होने पर जातक को अत्यंत कामुक बनाता है ! उसका अवैध सम्बंध बनता है तथा ऐसे जातक की कामवासना की तृप्ति आसान नहीं होती !
7. 👉 बुध और शुक्र की युति यदि सप्तम भाव में हो जाय तो जातक अवैध सम्बंधों के लिए नये नये तरीके अपनाता रहता हैं ! ऐसे जातक कृतिम साधन जैसे Dildo, गाजर, मूली से अपनी यौन संतुष्टि करने से भी नहीं हिचकती हैं !
8. 👉 शनि, मंगल और शुक्र का काम वासना से घनिष्ठ सम्बंध है यदि जन्म कुण्डली में शनि और मंगल की युति सप्तम भाव में हो तब जातक समलिंगी होता है ! यह युति यदि अष्टम, नवम, द्वादश भाव में बन रही हो तब जातक का अपने से बड़ी उम्र के विपरीत लिंगी से अवैध सम्बंध होता हैं !
9. 👉 मंगल और राहू की युति अथवा दृष्टि शुक्र के साथ बन रहा हो तब जातक कामुक होता है एवं अवैध सम्बंध बनाने के लिए उसका मन भटकता रहता है !
10. 👉 यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशम भाव में गुरु पर मंगल शुक्र का प्रभाव और चन्द्रमा पर राहू का प्रभाव हो तब व्यक्ति अवैध सम्बंध बनाने के लिए सभी सीमाओं को तोड़ कर अवैध सम्बंध बनाता है !
11. 👉 लग्न में शनि का स्थित होना जातक में अधिक कामवासना का द्योतक है, पंचम भाव में शनि स्थित होने पर अपने से बड़ी स्त्रियों के प्रति अवैध सम्बंध बनाने के लिए जातक को आकर्षित करता है !
12. 👉 शनि का सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ युति होने और मंगल की दृष्टि पड़ने पर जातक वेश्यागामी हो जाता है इसी योग में यदि शुक्र का भी सम्बंध दृष्टि अथवा युति से बन जाय तो अवैध सम्बंध होना निश्चित हो जाता है !
13. 👉 यदि चन्द्रमा जन्म कुण्डली में कहीं पर भी नीच का होकर बैठा हो और उस पर पाप प्रभाव हो तब जातक अपने अनुचरों, नौकर/नौकरानी से अवैध सम्बंध बनाता है ! यही चन्द्रमा यदि दूषित होकर नवम भाव में स्थित हो तो जातक अपने गुरु या गुरू की पत्नी अथवा अपने से बड़ों के साथ अवैध सम्बंध बनाता है !
14. 👉 मंगल रक्त का कारक होता है, जन्म कुण्डली में किसी पापी ग्रह के साथ मंगल की युति सप्तम भाव में हो या सूर्य सप्तम में और मंगल चतुर्थ स्थान में हो अथवा चतुर्थ भाव में राहू हो तब व्यक्ति कामुकता में अंधा होकर पशु समान व्यवहार करने लगता है !
15. 👉 राहू का अष्टम भाव में होना जातक को अवैध सम्बंध की तरफ प्रेरित करता है ! ऐसी बालिका के स्तन कम उम्र में ही विकसित हो जाते हैं !
16. 👉 तुला राशि में चार ग्रह एक साथ स्थित होने पर जातक के परिवार में क्लेश उत्पन्न करते हैं, जिसके कारण जातक बाहर अवैध सम्बंध बनाता है !
17. 👉 शनि का दशम भाव में होना जातक के मन में विरोधाभास उत्पन्न करता है ! शुक्र और मंगल की युति जन्म कुण्डली में कहीं पर भी हो एवं शनि दशम भाव में हो तब जातक ज्ञानवान तो होता है, साथ ही काम वासना और अवैध सम्बंधों को भी गम्भीरता से लेता है ! जिससे उसका मन स्थिर नहीं रह पाता, कभी ज्ञानी बन जाता है कभी अवैध सम्बंधों का दास !
18. 👉 यदि बुध और शनि का सम्बंध सप्तम भाव में हो तब ऐसे जातक यौनक्रियाओं में निरस एवं अयोग्य होते हैं ! ऐसे जातक का लिंग मुरझाया हुआ सा रहता है !
19. 👉 सूर्य का सप्तम भाव में होना जातक के वैवाहिक जीवन में क्लेश उत्पन्न करता है, इससे परेशान होकर जातक अवैध सम्बंध बनाता है !
20. 👉 यदि सप्तम भाव में राहू और शुक्र स्थित हो अथवा राहू और चन्द्रमा की युति हो तथा गुरु द्वादश भाव में स्थित हो तब विवाह पश्चात जातक कार्यस्थल पर ही अपने सहयोगी से अवैध-सम्बंध बनाता है !
21. 👉 यदि बुध और शनि की युति द्वादश भाव में हो जाय तो जातक शीघ्रपतन का रोगी बन जाता है ! इसी योग में यदि लग्न, सप्तम और अष्टम भाव में राहू स्थित हो तो व्यक्ति अपनी जवानी को स्वयं नष्ट कर देता है एवं उसका जीवनसाथी किसी अन्य से शरीरिक तृप्ति हेतु बाध्य होता है !
22. 👉 मंगल जोश और शुक्र भोग एवं द्वादश भाव अवैध सम्बंध में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है ! यदि मंगल, शुक्र और द्वादश भाव के स्वामी का सम्बंध सप्तम भाव से हो तब व्यक्ति लम्पट होता है एवं कई स्त्रियों से उसका अवैध सम्बंध होता है ! इन्हीं तीनों का योग चतुर्थ या द्वादश भाव में हो तब जातक अत्यंत कामी होता है और अपने जीवन में मर्यादा त्याग कर अत्यधिक अवैध सम्बंध बनाता है ! यदि लग्नेश एकादश भाव में स्थित हो और उस पर पाप प्रभाव हो तब जातक यौनाचार हेतु अवैध रूप से अप्राकृतिक यौनक्रियाओं में लिप्त हो जाता है !
23. 👉 जन्म कुण्डली में चन्द्रमा, मंगल, शुक्र, राहू, यदि सप्तम भाव, पंचम भाव या द्वादश भाव में आपस में सम्बंध बनाते हैं तब अवैध सम्बंध का निर्माण करते हैं !
24. 👉 मंगल शारीरिक शक्ति का कारक है तथा विवाह के पश्चात जो सम्बंध बनते हैं उसको भी दर्शाता है ! शुक्र तो स्वयं भोग विलास है, विपरित लिंग व अन्यों को आकर्षित करता है, कामेच्छा जगाता है, रोमांस देता है ! शनि नपुंसकता और वैराग्य भी देता है, आलोचना और योगों में अवैध सम्बंधों के कारक का भी कार्य करता है !
नोट :-
अवैध सम्बंधों के योगों को देखने से पूर्व जन्म कुण्डली में पापी व क्रूर ग्रहों, शुभ ग्रहों, और अन्य योगों का भी निरीक्षण कर लेना चाहिए क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि जन्म कुण्डली में अवैध सम्बंध योग बनता दिखायी दे रहा है किन्तु वहीं पर जन्म कुण्डली मेें पतिव्रता/एक पत्नीव्रत का भी योग है तब इन दोनों योगों में से जो योग बलवान होगा जातक का स्वभाव वैसा ही होगा ! शुक्र और सूर्य की युति लग्न में जहां व्यक्ति को व्याभिचार देता है, वहीं किसी शुभ ग्रह की युति अथवा दृष्टि उसके व्याभिचार योग को नष्ट कर देता है ! ऐसे ही मंगल और शुक्र की युति पंचम भाव में अवैध सम्बंध के स्थान पर प्रेम सम्बंध भी देता है !
ज्योतिर्विद पंडित डी.एन. पाण्डेय #प्रयागराज !
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