सूर्य राहु चंद्रमा एक साथ
ज्योतिष में बहुत से योग होते है और यह सभी ग्रह हमारी कुंडली मे एक ही भाव मे एक से ज्यादा हो सकते है इसमें ही अगर कुंडली मे सूर्य चंद्रमा राहु का योग हो तो क्या होगा
कुंडली मे सूर्य चंद्रमा देवता ग्रह है सूर्य आत्मा का कारक होता है चंद्रमा मन का कारक होता है राहु इनके साथ आत्मा और मन दोनों पर अपना बुरा प्रभाव देगा खास तौर पर चंद्रमा सबसे खराब स्तिथि में जायेगा क्योकि एक तो वो सूर्य के साथ अस्त होगा और साथ मे अमावस्या के आस पास का जन्म होगा उसके पास अपनी कोई कला नही होगी उसकी 16 कला लगभग खत्म होगी साथ मे राहु उसको विष ज़हर दे रहा है
आत्मा सूर्य मन चंद्रमा दोनों अच्छा कम और बुरा ज्यादा सोचेंगे न आपका मन सही संकेत देगा न ही अंतरात्मा से निकलने वाली आवाज़ आपको सही रास्ता दिखा पाएगी दो प्रभावशाली ग्रह ग्रहण में होंगे और यह सूर्य ग्रहण होगा क्योंकि सूर्य को हमेशा चंद्र के साथ राहु होने पर ग्रहण लगता है
ऐसा इंसान बहुत जल्दी धोखा खा जाता है और बाद में उससे बाहर आने के लिए नशे का शिकार हो जाता है खास तौर पर सूर्य चंद्र की दशा बहुत खराब जाने की संभावना होती है
ऐसे इंसान को अपने परिवार में इज़्ज़त नही मिल पाती कोई इंसान इन पर विश्वास नही करता है या कोई बड़ा कलंक इनको नोकरी परिवार की तरफ से जल्दी मिलजाता है यह लोग प्यार के भूखे होते है भावुक होते है क्योंकि चंद्रमा बहुत खराब स्थिति में है इनको जब अपनापन नही मिल पाता या हर जगह से इनको धक्के मार के निकाल दिया जाता है
फिर यही से राहु अपना प्रभाव दिखाता है इनको गलत सोसाइटी में गलत रास्ते मे भटका देता है
दिमाग मे एक चीज़ राहु भर देता है देख ले किसी ने तेरी इज़्ज़त नही करी तू भी इस दुनिया को लात मार और जो तुझे सही लगे वही कर
राहु हमेशा आग को हवा देता हूँ यही होती है बदले की भावना
जैसा कुछ लोगो के मुह से सुना होगा वो बोलते है जब इस दुनिया ने मुझे सुख नही दिया तो में क्यों सोचो इनके बारे में
यह एक पागलपन का योग है ना दिमाग स्थिर न मन काबू में एक जलन एक बदले की भावना मन और आत्मा को कब काबू में कर लेती है पता नही चलता
सालो की दुश्मनी अंदर अंदर जलती रहती है
फिर यह भगवान ने करे बहुत गलत संगत में चले जाते है अगर ब्रहपति की दृस्टि इन पर हो या ब्रहस्पति ग्रह मजबूत हो तो कुछ संभावना है रास्ता बदल लें
नही तो यह लोग आतंकवाद देशद्रोह चोरी या फिर सिर्फ और सिर्फ खुद के बारे में सोचते है
क्योकि इनके आत्मा और मन दोनों पर दाग लग जाता है इसलिए यह लोग अच्छा और बुरा समझ नही पाते
कोई भी इंसान जन्म से बुरा नही होता ग्रहो की स्थिति और में यह कहू हालात कुछ ऐसे बन जाते है भटकाव इनको मिल जाता है
और कई बार बहुत जल्दी जीवन भी इनका खत्म हो जाता है अगर सूर्य चंद्रमा राहु इनकी दशा इन पर आ जाय तो यह अपने आपको खुद खत्म कर लेते है
वो ऐसे शराब पीना किसी भी नशे का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करना
हम खुद के दुश्मन कब बन जाते है यह पता नही चलता अब बच्चे को परेशान देखकर ऐसे हालात में देखकर माता पिता भी दुखी रहते है
क्योकि सूर्य पिता का कारक होता है
और चंद्रमा माता का कारक होता है
माता पिता को भी अपने इस बच्चे की वजह से बहुत तकलीफ झेलनी पड़ती है या वो उसको अपनी प्रॉपर्टी नाम से अलग कर देते है
यह योग तब ज्यादा मजबूत होता है जब सूर्य चंद्रमा के अलावा कुंडली के नवम भाव उसके स्वामी कुंडली के चौथे भाव और स्वामी भी राहु के प्रभाव में आ जाए
यह योग खुद के साथ परिवार पर भी भारी हो जाता है
यह योग कुंडली के जिन भावो में बनेंगे उन भावो से ही ज्यादा तकलीफ आ सकती है
मेरी नज़र में यह बहुत खराब योग है
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