Skip to main content

शुक्र से संबंधित उपाय

🕉️ शुक्र से संबंधित उपाय 

🕉️ जन्मकुंडली में शुक्र निर्बल होने पर जातक को गर्मी , भूत- प्रेत बाधा, शीघ्र पतन, सेक्स संबंधी परेशानी, संतान उत्पत्ति में अक्षमता, शरीर दुर्बल एवं अशक्त, अतिसार, अजीर्ण, वायु प्रकोप आदि रोग होते हैं। इसके लिए लक्ष्मी की उपासना लाभदायक है।

🕉️ अशुभ शुक्र के कारण अंगूठा बेकार हो जाता है या दर्द रहता है।त्वचा में विकार आ जाते हैं, जातक प्रेम में पड़ कर अपना सर्वस्व गंवा देता है, वीर्य विकार या स्वप्न दोष होता है।
 दिल पर काबू रखें। प्रेम, प्यार और ऐय्याशी से दूर रहें।

🕉️ दिन में संभोग न करें, स्त्री का सम्मान करें, 43 दिनों तक गंदे नाले में नीला फूल डालें। कांसे के बर्तन का दान करें, किसी की सौगंध न लें या किसी की जमानत न दें।
Astro K Kumar 
🕉️ यदि कुंडली में शुक्र अनिष्टकारी स्थिति में हों तो अपने भोजन में से कुछ भोजन निकाल कर गाय को खिलाना लाभप्रद सिद्ध होगा। गौ दान और चरी (पशुओं का चारा) का दान करें। शुक्र से संबंधित दान में देने योग्य वस्तुएं हैं घी, दही, कपूर, मोती (दही रंग) स्त्रियों का पालना लाभप्रद है।

🕉️ शुक्र की देवी लक्ष्मी जी हैं, यदि कुंडली में शुक्र अनिष्टकारी हों तो लक्ष्मी पूजन करें। एक फूल प्रति दिन 43 दिन तक गंदे नाले में डालते रहें। 8 किलो गाजर धर्म स्थान में दिया करें, शुक्र को प्रसन्न रखने के लिए पत्नी (शुक्र) को वस्त्राभूषण से प्रसन्न रखना चाहिए और स्वयं भी साफ-सुथरा रहना चाहिए। एस्ट्रो के कुमार की पोस्ट 

🕉️ षष्ठम शुक्र की अशुभता मिटाने और सुख की वृद्धि के लिए उसके मित्रों की सहायता लेने के लिए छह (शुक्र) कन्याओं (बुध) को छह दिन दूध (चंद्रमा) और मिस्त्री (मंगल) पिलाना- खिलाना चाहिए।

🕉️ जब शुक्र, सूर्य के साथ षष्ठ भाव में हों तो महत्वपूर्ण कार्य पर जाने से पहले थोड़ी चीनी (मंगल) खा कर पानी (चंद्रमा) पीने से सूर्य के मित्र उसकी रुकावट मिटाते हैं।

🕉️ अष्टम शुक्र की अशुभता मिटाने के लिए काली गाय (अष्टम शुक्र) को हरा ज्वार (शुक्र की वस्तु) खिलाना चाहिए।

🕉️ यदि शुक्र, 7 राहु के साथ द्वादश में स्थित होकर पत्नी का  स्वास्थ्य खराब कर रहे हों तो नीले (राहु) फूलों (शुक्र) को सुनसान जगह में पृथ्वी ' (शुक्र) में गाड़ने से राहुजनित दोष शांत होते हैं।

🕉️ देवी लक्ष्मी की पूजा-आराधना (शुक्र की इष्ट) से शुक्र अनुकूल फल देते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

षोडष वर्ग कुण्डली एवम उसका फलित

षोडष वर्ग कुण्डली तथा उसका फलित : .      षोडश वर्ग का फलित ज्योतिष में विशेष महत्व है ! जन्मपत्री का सूक्ष्म अध्ययन करने में यह विशेष बहुत सहायक होते हैं ! इन वर्गों के अध्ययन के बिना जन्म कुण्डली का विश्लेषण अधूरा होता है ! क्योंकि जन्म कुण्डली से केवल जातक के शरीर, उसकी संरचना एवं स्वास्थ्य के बारे में ही विस्तृत जानकारी मिलती है, परन्तु षोडश वर्ग का प्रत्येक वर्ग जातक के जीवन के एक विशिष्ट कारकत्व या घटना के अध्ययन में सहायक होता है ! #षोडशवर्ग_किसे_कहते_है : .     हम जानते हैं कि अगर राशिचक्र को बराबर 12 भागों में बांटा जाय तब हर एक हिस्‍सा राशि कहलाता है ! सूक्ष्‍म फलकथन के लिए राशि के भी विभाग किए जाते हैं और उन्‍हें वर्ग कहते हैं ! वर्गों को अंग्रेजी में डिवीजन (division) और वर्गों पर आधारित कुण्‍डली (वर्ग चर्क्र) को डिवीजनल चार्ट (divisional chart) कह दिया जाता है ! वर्गों को ज्‍योतिष में नाम दिए गए हैं ! जैसे — .     यदि राशि को दो हिस्‍सों में बांटा जाय तब ऐसे विभाग को होरा कहते हैं ! इसी तरह यदि राशि के तीन हिस्‍से किये जायें तब उस...

शेयर बाजार में सफलता

शेयर मार्केट में सफलता के योग कुंडली में देखना एक महत्वपूर्ण विषय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव वित्तीय सफलता, विशेषकर शेयर मार्केट में, को निर्धारित करता है। नीचे कुछ मुख्य योग और ग्रह स्थिति दी गई हैं जो शेयर मार्केट में सफलता का संकेत देती हैं: 1. बुध ग्रह की स्थिति बुध ग्रह बुद्धि, तर्क, और व्यापार का कारक ग्रह है। यदि बुध मजबूत हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो व्यक्ति को व्यापार और शेयर मार्केट में सफलता मिलती है। बुध का दूसरे, पांचवें, नवें या ग्यारहवें भाव में होना शुभ माना जाता है। बुध पर शुभ ग्रहों (जैसे बृहस्पति या शुक्र) की दृष्टि हो तो और भी लाभकारी होता है। 2. ग्यारहवें भाव की स्थिति ग्यारहवां भाव लाभ और आय का भाव है। यदि ग्यारहवें भाव का स्वामी शुभ ग्रहों के साथ हो और अशुभ ग्रहों से मुक्त हो, तो शेयर मार्केट में सफलता के योग बनते हैं। ग्यारहवें भाव में बृहस्पति, शुक्र या बुध की स्थिति लाभकारी होती है। 3. पंचम भाव और निवेश योग पंचम भाव निवेश, सट्टा, और भविष्य के लाभ को दर्शाता है। पंचम भाव का स्वामी अगर लाभ स्थान ...

नक्षत्र और शरीर के अंग

.         #27_नक्षत्र_और_शरीर_के_अंग :  (Relation Between Nakshatra and Body Parts) : .   वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को भी शरीर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है ! सभी 27 नक्षत्र शरीर के किसी ना किसी अंग का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन अंगों से  सम्बंधित परेशानी भी व्यक्ति को हो जाती हैं ! जो नक्षत्र जन्म कुण्डली में पीड़ित होता है उससे सम्बंधित बीमारी व्यक्ति को होने की  सम्भावना बनती है अथवा जब कोई नक्षत्र गोचर में पीड़ित अवस्था में होता है,  तब उससे सम्बंधित अंग में परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है !  .       इस लेख के माध्यम से आज हम उन सभी नक्षत्रों व उनसे सम्बंधित शरीर के अंगों के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ इससे आपके मन में उठने वाले ऐसे प्रश्नो का समाधान हो जायगा ! मेरे कुछ शिष्य अक्सर यह जानना चाहते हैं कि कौन सा नक्षत्र शरीर के किस अंग का प्रतिनिधित्व करता है ! इससे उनका भी समाधान हो जायेगा ! #अश्विनी_नक्षत्र : अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु हैं ! यह पहला नक्षत्र है और इसलिए यह सिर के ...