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Showing posts from February, 2022

अष्टम भाव के रहस्य

अष्टम भाव की महिमा आइए जानते हैं इस भाव के कुछ छोटे छोटे परंतु गंभीर रहस्यों को । 1 सूर्य :-- अष्टम भाव में सूर्य देव जातक को क्रोधी ओर वाचाल बनाते हैं व जातक दूर की स्त्री से एक लम्बा संपर्क रखेगा । ओर यहां सूर्य देव निम्न सरकारी नौकरी के कारक भी हो जाते हैं चाहे नीच के ही क्यों ना हो । 2 चंद्र :-- अष्टम भाव में चंद्र देव जातक को दीर्घायु तो बनाते हैं लेकिन माता ओर कुटुंब से दूर सुनिश्चित है । जातक को परदेश या विदेश में जाकर कामयाबी मिलने की संभावना प्रबल हो जाती है । 3 मंगल :-- अष्टम भाव काल पुरुष की कुंडली में मंगल देव का अपना भाव है जातक डिसिप्लिनड होगा कानून को मानेगा जल्दी से बिमार नहीं होता । कोई ना कोई जुगाड़ करके अपनी जीविका चलाते हैं । 4 बुध :-- बुध देव का अष्ठम भाव से संबंध सबसे रहस्यमय होता है । ऐसा जातक एक अच्छा ज्योतिषी, तंत्रिका पैरानोमिक शक्तीयों का धनी ओर अघोर विद्या कि तरफ आकर्षित होता है । 5 गुरु :-- अष्टम भाव गुरु देव या गुरु देव का अष्ठम भाव से संबंध भी बहुत ही उत्तम भूमिका निभाते हैं यह संबंध जातक को एक अच्छा ज्योतिषी भी बनाते हैं । 6 शुक्र :-- अष्टम भाव में शुक्र...

राहु संग ग्रहों का योग

राहु संग ग्रहों के योग ********************* राहू के साथ चंद्र माँ का सुख कम होता है राहू संग मंगल भाई का सुख कम रहता है राहू संग गुरु विद्या सुख कम करता है राहु संग सूर्य पिता का सुख कम होता है राहू-संग बुध बुआ या मौसी बहन सुख कम होता है राहू-शनि -प्रेत श्राप होता है कारोबार नही चलता कामों में अड़चन चाचा से मुसीबत अथवा अच्छे रिश्ते नही होते और यदि राहू नीच का है तो कोर्ट कचहरी,मुकदमा जेल , ससुराल से परेशानी होती है कुंडली में ********* (1)-- राहू-संग चन्द्र -- मातृ श्राप . (२)- राहू-संग मंगल - भ्रात श्राप (3) राहू-संग शनि -प्रेत श्राप (४)-- राहू-संग सूर्य -- पित्र श्राप (5) राहू संग -शुक्र -- स्त्री दोष होने से लक्ष्मी रूठी रहती है वैवाहिक सुख कम मिलता है

ग्रहों के गोचर की की दशा में फलादेश

🌷 #ग्रहों_के_गोचर_की_स्थिति_में_फलादेश : 🌷 🎆 1- यदि किसी जातक की लग्न कुण्डली मे कोई ग्रह 'नीच'  "अस्त"  या शत्रु  क्षेत्रीय हो तब गोचर में उस ग्रह के अनुकूल होने पर भी वह शुभ फल प्रदान नही करता है ! अर्थात गोचर में उस ग्रह का शुभत्व नष्ट हो जाता है ! इसी प्रकार जन्म कुण्डली मे शुभ कारक ग्रह गोचर में शुभ स्थिति में आने पर शुभ फल प्रदान करते हैं ! ,🎆 2 - यदि गोचर में किसी जातक की जन्म राशि से सूर्य 8वें भाव मे "मंगल 7वें भाव  में" राहु 9वें भाव मे शुक्र 6वें भाव मे गुरु तीसरे भाव मे शनि लग्न में और बुद्ध सातवें भाव में स्थित हों तब जातक के धन और सम्मान की हानि कराते हैं !  🎆 3 - यदि गोचर में  शुक्र  6, 7 या 10 वें स्थान में स्थित हों तब शुभ फल नहीं देते जब तक कि उसके  विपरीत वेध स्थान में कोई ग्रह स्थित न हो !  🎆 4-  किसी जातक की जन्म राशि से गोचर में 1- 2 - 4 - 5 -7 -8 -12वें स्थान में स्थित सूर्य - मंगल - शनि - राहु  व केतु  धन और स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे नही होते हैं ! 🎆 5 - यदि किसी जातक के जन्म राशि से चन्द्रमा 6...

नक्षत्र के अनुसार व्यवसाय का चयन

नक्षत्र के अनुसार व्यवसाय  चयन आजीविका चयन का ज्योतिष में प्राचीन और सर्वमान्य नियम यह है कि कर्मेश/दशमेश जिस ग्रह के नवांश घर में हो उस ग्रह के गुण धर्म के अनुसार व्यक्ति की आजीविका होगी। इसके अतिरिक्त ज्योतिष ग्रंथों और वृहत-संहिता खंड-एक के अध्याय 15 में उल्लेख के अनुसार जन्म नक्षत्र और कर्म नक्षत्र के अनुसार आजीविका, व्यापार या सर्विस चुनने में सफलता जल्दी मिलती है। तदनुसार बालक पढ़ाई करें। इनके विषयों की पढ़ाई से सफलता मिलेगी। 1. अश्विनी नक्षत्र: खिलाड़ी, सेनापति, डाक्टर, वाहन का व्यापार, शिक्षक।  2. भरणी नक्षत्र: ब्लड बैंक, पैथोलाजिस्ट या अनाज व्यापारी, कार्यालय मैनेजर।  3. कृतिका नक्षत्र: फायनेन्स कार्य (बैंकर), बर्तन, क्राकरी व्यापारी, चार्टर्ड अकाउन्टेंट आदि। 4. रोहिणी नक्षत्र: व्यापार, टेक्सटाइल एजेन्सी, पायलट, किसान, खनिज व्यापार, डेयरी संचालक, विज्ञान प्रोफेसर।  5. मृगशिरा नक्षत्र: कपड़ा व्यापार, संगीतज्ञ, आफिस कार्य, जेलर, साफ्टवयेर इंजिनीअर, अधिकारी-जज। 6. आर्द्रा नक्षत्र: पुलिस विभाग, वकील, राजनेता, दवाई व्यापार, डाक्टर।  7. पुनर्वसु नक्षत्र: अभिन...

षोडष वर्ग कुण्डली एवम उसका फलित

षोडष वर्ग कुण्डली तथा उसका फलित : .      षोडश वर्ग का फलित ज्योतिष में विशेष महत्व है ! जन्मपत्री का सूक्ष्म अध्ययन करने में यह विशेष बहुत सहायक होते हैं ! इन वर्गों के अध्ययन के बिना जन्म कुण्डली का विश्लेषण अधूरा होता है ! क्योंकि जन्म कुण्डली से केवल जातक के शरीर, उसकी संरचना एवं स्वास्थ्य के बारे में ही विस्तृत जानकारी मिलती है, परन्तु षोडश वर्ग का प्रत्येक वर्ग जातक के जीवन के एक विशिष्ट कारकत्व या घटना के अध्ययन में सहायक होता है ! #षोडशवर्ग_किसे_कहते_है : .     हम जानते हैं कि अगर राशिचक्र को बराबर 12 भागों में बांटा जाय तब हर एक हिस्‍सा राशि कहलाता है ! सूक्ष्‍म फलकथन के लिए राशि के भी विभाग किए जाते हैं और उन्‍हें वर्ग कहते हैं ! वर्गों को अंग्रेजी में डिवीजन (division) और वर्गों पर आधारित कुण्‍डली (वर्ग चर्क्र) को डिवीजनल चार्ट (divisional chart) कह दिया जाता है ! वर्गों को ज्‍योतिष में नाम दिए गए हैं ! जैसे — .     यदि राशि को दो हिस्‍सों में बांटा जाय तब ऐसे विभाग को होरा कहते हैं ! इसी तरह यदि राशि के तीन हिस्‍से किये जायें तब उस...

दरिद्रता निवारण के सरल उपाय

दरिद्रता निवारण के सरल उपाय व्यक्ति कमाता बहुत है परंतु धन टिकता नहीं और धन घर बहुत आता है परंतु रुकता नहीं है घर दरिद्री बना रहता है तो आप सभी के कुछ विशेष प्रयोग प्रस्तुत कर रहा हूं आप सभी इन उपायों को करें घर की दरिद्रता और जीवन की की दरिद्रता को नष्ट करे। 1. प्रतिदिन प्रात: जल्दी उठ कर इष्ट आराधना करने से दरिद्रता दूर होती हैं। 2. गुरुवार के दिन घर में गाय के गोबर का लेपन आदि करने से दरिद्रता दूर होती हैं। 3. गुरुवार के दिन पीली वस्तु का भोजन करने से दरिद्रता दूर होती हैं। 4. दान-पुण्य इत्यादि कर्म करते रहने से दरिद्रता दूर होती हैं। 5. प्राण-प्रतिष्ठित सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दरिद्रता से मुक्ति मिलती हैं। 6. घर में प्राण-प्रतिष्ठित प्राण-प्रतिष्ठित दक्षिणावर्ती शंख कि घरमें स्थापना से लक्ष्मी का स्थायी वास होता हैं, शत्रुओं से रक्षा होती है, रोग, ॠण, अज्ञानता एवं दरिद्रता से शीघ्र मुक्ति मिलती हैं। 7.घर में प्राण-प्रतिष्ठित विष्णु शंख (श्वेत रंग का शंख) स्थापित करने से एवं नित्य पूजन करने से दरिद्रता दूर होती हैं। 8.श्री सूक्त का पठन करने से भी दरिद्रता से मुक्ति मिलती हैं...